अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर स्थित किड्स कॉर्नर स्कूल एक बार फिर विवादों में है. स्कूल की मान्यता न होने के कारण अभिभावकों ने सोमवार को परिसर के बाहर जमकर हंगामा किया. अभिभावकों का आरोप है कि इस स्थिति से उनके बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है. यह मामला तब सामने आया जब स्कूल के बाहर “मान्यता प्राप्त नहीं है” लिखा गया. इसके बाद जब अभिभावक अपने बच्चों को अन्य स्कूलों, विशेषकर रेलवे स्कूल में दाखिला दिलाने पहुंचे, तो उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा.

अभिभावक प्रीति त्रिपाठी ने बताया कि वह अपने जेठ के बेटे का दाखिला रेलवे स्कूल में कराने गई थीं. हालांकि स्कूल प्रिंसिपल ने फॉर्म लेने से इनकार कर दिया और बच्चे का PEN (Permanent Education Number) और APAAR ID मांगी, जो किड्स कॉर्नर स्कूल द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया था. प्रीति त्रिपाठी के मुताबिक किड्स कॉर्नर स्कूल की मान्यता न होने के कारण बच्चों का PEN नंबर और APAAR ID नहीं बन पा रहा है. अभिभावकों को चिंता है कि इन आवश्यक दस्तावेजों के बिना बच्चों का भविष्य अधर में है और आठवीं के बाद उच्च कक्षाओं में दाखिला मिलना मुश्किल हो सकता है.

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इसी तरह, अभिभावक नरगिस सुल्ताना ने भी अपनी समस्या साझा की. उनकी बेटी ने किड्स कॉर्नर स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की है, लेकिन PEN नंबर और APAAR ID की कमी के कारण अब उसे रेलवे स्कूल में दाखिला नहीं मिल पा रहा है. नरगिस सुल्ताना ने बताया कि पूर्व स्कूल द्वारा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने से प्रवेश प्रक्रिया बाधित हो गई है. अभिभावकों का कहना है कि इन आईडी के बिना बच्चों की शैक्षिक पहचान अधूरी रहती है, जिससे आगे की पढ़ाई, परीक्षा पंजीकरण और स्कूल बदलने में दिक्कतें आती हैं.

अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है. उनकी प्रमुख मांगों में बच्चों का रेलवे स्कूल में दाखिला, सभी छात्रों के लिए PEN नंबर और APAAR ID जारी करना, किड्स कॉर्नर स्कूल की मान्यता की स्थिति स्पष्ट करना और दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है. मामले में रेलवे स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों को आश्वासन दिया है कि प्रवेश को लेकर समाधान निकाला जाएगा. हालांकि आईडी संबंधी समस्या के समाधान के लिए समय मांगा गया है. फिलहाल किड्स कॉर्नर स्कूल प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है. स्कूल प्रधानाचार्य मीडिया के द्वारा बात करने की कोशिश कीगई तो मीडिया सेदुर्व्यवहार करने का प्रयास किया. बात करने कोलेकर दूरी बनाती रही. यह मामला निजी स्कूलों की मान्यता, छात्र डेटा प्रबंधन और सरकारी व्यवस्था के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है, जिसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है.