अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. परिवहन विभाग पर एक बार फिर सवालों के पहिए घूमने लगे हैं. आरोप है कि यहां कानून की किताब से ज्यादा ताकत ‘एंट्री फीस’ की रसीदों में दिखाई दे रही थी. गाजीपुर के ट्रांसपोर्टर सुनील यादव ने आरोप लगाया है कि ट्रकों को बेवजह रोककर चालान और सीज करने की धमकी दी जाती थी और इस ‘मुसीबत’ से बचने का आसान रास्ता था—प्रति ट्रक 5000 महीना.

मामला तब गरमाया जब 19-20 फरवरी की रात चंदौली–मिर्जापुर बॉर्डर पर एक ट्रक को रोके जाने की घटना सामने आई. आरोप है कि ट्रक को वहीं छोड़ने के बजाय जबरन चंदौली लाकर चालान किया गया और पुलिस चौकी में खड़ा करा दिया गया. सवाल उठ रहा है कि अगर ट्रक में इतनी ही बड़ी गड़बड़ी थी तो उसे बॉर्डर से ही निपटाया क्यों नहीं गया? पीड़ित ट्रांसपोर्टर का दावा है कि इससे पहले भी करीब 90 हजार रुपये ‘इंट्री फीस’ के नाम पर ऑनलाइन वसूले जा चुके हैं. इतना ही नहीं, एक सिपाही पर ऑनलाइन और नकद 6 लाख के करीब दोनों तरह से पैसे लेने का आरोप लगाया गया है. यानी सड़क पर चलने वाले ट्रकों के लिए नियमों से ज्यादा जरूरी शायद ‘मंथली पास’ हो गया था.

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लगातार ARTO टीम की बढ़ती डिमांड से अजीज ट्रांसपोर्टर ने DIG वाराणसी परिक्षेत्र से गुहार लगाई. इस पर DIG के निर्देश पर एसपी चंदौली आदित्य लांगहे ने मामले की पड़ताल कर ट्रांसपोर्टर सुनील यादव द्वारा दिए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज करते हुए पूरे प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी सदर देवेंद्र कुमार को सौंप दी. ARTO के सिपाही दुर्गा श्रीवास्तव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. हालांकि भ्रष्टाचार के इस सिस्टम के बड़े नुमाइंदों पर अब जांच की तलवार लटक रही है. पूरे प्रकरण पर क्षेत्राधिकारी सदर का कहना है कि अगर आरोप और साक्ष्यों की पड़ताल में अन्य लोग शामिल मिले तो उनके ऊपर भी कार्रवाई सुनिश्चित होगी. फिलहाल सवाल यही है कि क्या यह वसूली का निजी सिस्टम था या फिर कानून के नाम पर चलता कोई ‘अनौपचारिक टोल टैक्स’? जांच की सुई अब जिस दिशा में घूमेगी, वही तय करेगा कि सड़क पर कानून का राज है या फिर ‘इंट्री फीस’ का.