प्रमोद निर्मल, मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी। जिले में स्कूली बच्चों के अध्यापन और प्रशासनिक अनुशासन के साथ बड़ी अनियमितता सामने आई है। मचांदूर स्थित माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षिका आशा धृतलहरे ने पोस्टिंग के छह महीने के भीतर दो बार लगातार तीन-तीन महीने की लंबी मेडिकल छुट्टी ली। वहीं, केवल ड्यूटी जॉइन करने के लिए ही स्कूल आना और अगले दिन छुट्टी का आवेदन देना उनकी आदत बन गई। इस लगातार अनुपस्थिति और अनियमित व्यवहार से स्थानीय ग्रामीण और अभिभावक आक्रोशित हो गए। उन्होंने स्कूल के गेट पर ताला लगा दिया और बच्चों के साथ धरने पर बैठ गए। विरोध प्रदर्शन सुबह से दोपहर तक जारी रहा।

जानकारी के अनुसार, अंबागढ़ चौकी विकासखंड में पदस्थ शिक्षिका आशा धृतलहरे की युक्तियुक्तकरण के तहत 3 जून को नवीन पदस्थापना मोहला विकासखंड के मचांदूर माध्यमिक शाला में हुई। 16 जून को ड्यूटी जॉइन करने के बाद वह अगले ही दिन तीन महीने के मेडिकल अवकाश पर चली गई। इसके बाद 30 सितंबर को स्कूल लौटने के बावजूद, 1 अक्टूबर से फिर से तीन महीने की छुट्टी पर चली गई। हाल ही में 13 जनवरी को स्कूल में ड्यूटी जॉइन की, लेकिन अगले ही दिन, 14 जनवरी को छुट्टी का आवेदन देकर अनुपस्थित हो गई।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) राजेंद्र देवांगन समेत शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया और आश्वासन दिया कि पास के किसी अन्य स्कूल से वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था कर दी जाएगी। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त किया।

बीईओ ने बताया कि मचांदूर माध्यमिक शाला में अब तीन अध्यापकों की व्यवस्था होगी – एक नियमित शिक्षक, एक ट्यूटर और एक वैकल्पिक शिक्षक। इससे स्कूल में पढ़ाई की व्यवस्था नियमित रूप से संचालित होगी।

शिक्षिका के खिलाफ होगी कार्रवाई

बीईओ राजेंद्र देवांगन ने कहा कि आशा धृतलहरे द्वारा प्रस्तुत मेडिकल प्रमाणपत्र विभागीय मान्यता प्राप्त मेडिकल बोर्ड से जारी नहीं था, इसलिए उनकी छुट्टी स्वीकृत नहीं की गई है। उनका वेतन भी फिलहाल रोका गया है। 13 जनवरी को ड्यूटी जॉइन करने के अगले ही दिन अनुपस्थित पाए जाने के कारण शिक्षिका को नोटिस भेजा जाएगा और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बीईओ ने स्पष्ट किया कि शिक्षिका ने पिछले दो बार फिट/अनफिट मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत किए थे, लेकिन उन्हें विभाग द्वारा स्वीकार नहीं किया गया। पोस्टिंग के छह महीनों में केवल तीन दिन स्कूल में ड्यूटी पर उपस्थित रहने वाली शिक्षिका की इस कार्रवाई ने न केवल शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी रोष भी पैदा किया।

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