रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। प्रदेश दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस की पूर्व भूपेश बघेल सरकार पर नक्सलियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है। इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए अमित शाह पर विरोधाभासी बयान देने और दबाव में राजनीति करने का आरोप लगाया।

अमित शाह का भूपेश सरकार पर बड़ा आरोप
8 फरवरी को रायपुर में आयोजित ऑर्गनाइजर कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि वे भूपेश बघेल के कार्यकाल के दौरान भी केंद्रीय गृह मंत्री थे और पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कह सकते हैं कि उस समय माओवादी आतंक को प्रश्रय दिया गया।

अमित शाह ने कहा था कि वे यह समझ नहीं पाते कि कोई सरकार हथियारबंद समूहों को संरक्षण कैसे दे सकती है। उन्होंने साफ शब्दों में भूपेश बघेल सरकार को नक्सलियों का संरक्षक बताया।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, भूपेश बघेल का पलटवार

भूपेश बघेल ने अमित शाह के बयानों में विरोधाभास का लगाया आरोप
केंद्रीय गृह मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अमित शाह के आरोपों को राजनीतिक दबाव में दिया गया बयान करार दिया। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान नक्सल घटनाओं में करीब 60 प्रतिशत की कमी आई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 में अमित शाह ने खुद उनकी सरकार की तारीफ की थी, अमित शाह उस समय अंदरूनी इलाकों तक गए थे और विकास कार्यों की तारीफ करते थे, लेकिन अब वे बिल्कुल उलट बयान दे रहे हैं, जो उनकी राजनीतिक मजबूरी को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि अमित शाह पहले यह तय करें कि कौन-सा बयान सही है जो उन्होंने 2022 में दिया था या जो अब दे रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार नक्सलवाद की समाप्ति चाहती थी, लेकिन औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि आदिवासियों के विकास के लिए। उन्होंने कहा कि नक्सल समस्या की समाप्ति तभी मानी जा सकती है, जब अर्धसैनिक बलों की तैनाती और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सामान्य स्थिति में आ जाए।
पुराने बयानों की कतरनें दिखाईं
भूपेश बघेल ने मीडिया के सामने पुराने अखबारों की कतरनें दिखाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने समय-समय पर छत्तीसगढ़ में नक्सल घटनाओं में कमी की बात मानी थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रियों ने संसद में भी स्वीकार किया था कि नक्सली घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई है। ऐसे में अब लगाए जा रहे आरोप समझ से परे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमित शाह को छत्तीसगढ़ में बयान देने के बजाय लोकसभा में मौजूद होना चाहिए।
बस्तर रोडमैप पर भी सवाल
अमित शाह द्वारा बस्तर के लिए जारी किए गए रोडमैप को लेकर भी भूपेश बघेल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब अमित शाह उनके कार्यकाल में दो बार बस्तर आए थे, तब वे खुद उनके साथ एक दौरे में मौजूद थे। दूसरे दौरे में अमित शाह सुकमा के एक कैंप में रुके थे और वहां स्कूल, राशन, वनाधिकार पट्टा, आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं की जानकारी ली थी, जो पहले से ही कांग्रेस सरकार के समय शुरू की जा चुकी थीं। उन्होंने कहा कि ये काम पहले ही किए जा चुके हैं, जबकि अब सिर्फ रोडमैप तैयार किए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, नक्सलवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र और राज्य की राजनीति एक बार फिर आमने-सामने है, जिससे आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत और गरमाने के आसार हैं।
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