CG EXCLUSIVE: नशे के साथ परोस रहे धोखा, Pan Parag खाने वाले रहें सावधान !

श्याम अग्रवाल, खरोरा (रायपुर)। छत्तीसगढ़ में तंबाकू युक्त गुटखा पर प्रतिबंध लगा हुआ है. तंबाकू युक्त गुटखा बेचना अपराध की श्रेणी में आता है. युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं. बावजूद इसके खुलेआम गुटखा की बिक्री हो रही है. अब नामी पान पराग (Pan Parag) गुटखा कंपनी नशे के साथ ग्राहकों को धोखा परोस रही है. उनके जान के साथ खिलवाड़ कर रही है. लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही है.

दरअसल राजधानी रायपुर के खरोरा में अगस्त महीने में उत्पादन किए गए पान पराग (Pan Parag) गुटखा की बिक्री की जा रही है. जबकि अभी अगस्त महीने की शुरुआत भी नहीं हुई है. ऐसे में कंपनी और सिस्टम पर सवाल उठना लाजमी है. कंपनी के अधिकारी जवाब देने से बच रहे हैं. खाद्य विभाग की अधिकारी प्रियंका मांझी दफ्तर में बैठकर शिकायत का इंतजार कर रहीं हैं. जबकि उन्हें इस बात की जानकारी दी गई है. वो जरा सा भी जहमत नहीं उठाते की बाजारों में जाकर खाद्य सामग्रियों की जांच की जाएगी. क्या सिस्टम को किसी अनहोनी का इंतजार है ? या फिर कहें कि सांठगाठं है ?

जुलाई में बिक रहा अगस्त महीने में उत्पादन का गुटखा

किसी भी खाद्य सामग्री में उसके बनने की तारीख और उसके एक्सपायरी होने की तारीख दोनों लिखी रहती है. पान पराग गुटखा कंपनी पैकिंग की तारीख न डालकर अगले महीने की तारीख डाल रखा है. जिससे कंपनी को बेचने के लिए निर्धारित समय से ज्यादा समय मिल सके. अभी जुलाई का आखिरी महीना चल रहा है, लेकिन पान पराग कंपनी अपने निजी लाभ के लिए उत्पादन की तीरख अगस्त 2021 लिख रखा है. जिसे पूरे जिले भर में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है.

लाखों का कारोबार और साइड इफ़ेक्ट भी

पान पराग (पान मसाला) की बिक्री भारत समेत कई देशों में होती है. गुटखा में एक्सपायरी डेट इसलिए डाली जाती है, क्योंकि उसके बाद लोग इसका इस्तेमाल न करें. लेकिन पान पराग कंपनी गलत जानकारी डालकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है. जिसके कई साइड इफ़ेक्ट भी हो सकते है. ये भी हो सकता है कि एक्सपायरी डेट का गुटखा डेट बदलकर बेचा जा रहा हो. अकेले रायपुर जिले में ही एक दिन में लाखों रुपए का कारोबार होता है. एक सप्ताह में करीब 10 लाख से अधिक रुपए का पान पराग बिकता है.

कंपनी के अधिकारी नहीं दे रहे जवाब

पान पराग एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड है. उसकी हर जिलों में अपनी एक उत्पादन शाखा होती है. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में मिरानीस फ्रेगरेंस नामक कंपनी है, जो इसका उत्पादन करती है. उसे बाजार में डिस्ट्रीब्यूट करती है. वही चिराग मिरानी हेड पान पराग (रायपुर) से जब बात की गई, तो उन्होंने कहा कि आप कंपनी के हेड ऑफिस में बात कीजिए.

क्या है शासन की गाइडलाइन ?

शासन की गाइडलाइन के अनुसार खाद्य सामग्री में उसके बनने और खराब होने की जानकारी देना अनिवार्य होता है. वही गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई और जुर्माने का भी प्रावधान है. एस.पी. तिवारी वकील (हाईकोर्ट) ने बताया कि गलत जानकारी लिख लोगों को माल बेचना भी धोखाधड़ी के अंतर्गत आता है. इतनी बड़ी कंपनी ने लाखों लोगों के साथ धोखा किया है. उक्त कंपनी के विरुद्ध धारा 420 के तहत अपराध पंजीबद्ध होगा.

कितना खतरनाक है पान मसाला

निकोटिन और मैग्नीशियम काबरेनेट युक्त गुटखा पान मसाला खाने वाले कैंसर और अन्य मर्जो की चपेट में तो आ ही रहे हैं. साथ ही सादा पान मसाला भी उतना ही खतरनाक साबित हो रहा है. विकल्प के रूप में सादा पान मसाला खाने वाले किसी किस्म के भ्रम में न जिएं. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह भी जानलेवा बनकर जिंदगी का जायका ही बिगाड़ रहा है. इसे बनाने में भी जिस प्रकार के रसायन और खतरनाक विधि का इस्तेमाल किया जाता है, उससे यह पूरा तैयार होकर जहर की पुड़िया का रूप ले लेता है. सादा गुटखा पाउच खाने वालों को भी कैंसर, नपुंसकता, एलर्जी, गाल के त्वचा का रंग बदलना, गले का संक्रमण और अन्य किस्म की जानलेवा बीमारियां हो रहीं हैं.

तम्बाकू को छोड़कर साधारण गुटखा पाउच को बेहतर विकल्प मानने वाले एडिक्शन का शिकार होकर इसको ज्यादा खाते हैं. अनेक मामलों में इसका नतीजा यह निकलता है कि इसका आदी हो चुका व्यक्ति बाद में जिंदगी से हाथ धो बैठता है. किसी भी किस्म का गुटखा पाउच जहर से कम नहीं है. इसको समय पर त्यागकर ही जिंदगी के करीब आया जा सकता है. सामान्य गुटखा पाउच गाल में तो प्रभाव डालता ही है, साथ ही श्वास नली में सिकुड़न पैदा करता है. इसके लगातार खाने से गला चिपकने लगता है. रसायन अपना प्रभाव छोड़ते हैं और अनेक बार इन लक्षणों के बाद कैंसर तक सामने आता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वयस्कों के तंबाकू सेवन पर किए गए विश्वस्तरीय सर्वे के मुताबिक भारत में 15 वर्ष से अधिक उम्र के 28.6 प्रतिशत यानी कि 26.68 करोड़ लोग तंबाकू का किसी न किसी रूप में सेवन करते हैं. इनमें से 19.94 करोड़ धुआंरहित तंबाकू का सेवन करते हैं, तो 9.95 करोड़ लोग धूम्रपान (सिगरेट या बीड़ी) करते हैं. तंबाकू खाना, तंबाकू को मसूढ़े और होठ के बीच रखना और नसवार सूंघना, धुआंरहित तंबाकू की श्रेणी में आते हैं.

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