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पुरषोत्तम पात्र, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने 2640 रुपये में खरीदी करेगी, लेकिन इसका फायदा और कालाबाजारी करने आडिशा के लोग उठाने के लिए आतुर हैं. बिचौलिए समर्थन मूल्य में धान बिकवाने के लिए ओडिशा से भारी मात्रा में धान लेकर CG में डंप कर रहे हैं. ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हो रहा है कि इसके पहले समर्थन मूल्य में धान खपा कर बिचौलिए चांदी काट गए थे. अब एक मर्तबा फिर से सरकार को चूना लगाने की तरबीक निकाल ली गई है.
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दरअसल, देवभोग अमलीपदर इलाके में ओडिशा के धान की आवक शुरू हो गई है. देवभोग के कोदोभांठा बरही इलाके से धान मंडी लाइसेंसी कारोबारियों के पास बिकने आ रहा है. अभी 1200 से 1500 रुपये क्विंटल के दर पर ख़रीदी हो रही है. प्रत्येक वर्ष हमारे प्रदेश की तुलना में ओडिशा के कालाहांडी जिले में धान जल्द तैयार हो जाता है. दो फसलीय होने के कारण ओडिशा में मंडी शुरू होते तक धान की कीमत काफी कम होता है. ऐसे में मुनाफा को देखते हुए किसान धान को सीमा पार भेज देते हैं.
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व्यापार पर रोक लगी तो आधी हो गई मंडी शुल्क
वर्ष 2020-21 में धान का मंडी शुल्क 68 लाख 1,492 प्राप्त हुआ था, लेकिन बीते वर्ष जिला प्रसाशन ने समर्थन मूल्य में खरीदी शुरू होने के बाद ओडिशा से धान आवक पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही नवंबर माह से मंडी लाइसेंसी कारोबारियों के खरीदी पर भी कड़े नियम लागू कर दिए थे. परिणाम स्वरूप वर्ष 21-22 में लगभग आधे यानी 35 लाख 34299 रुपये ही धान कारोबार के एवज में मंडी शुल्क सरकार को मिले.
किसानों के रकबे में खपा, बिचौलिए काटे चांदी
कड़ाई के कारण मंडी लाइसेंसी व्यापारी धान खरीदी बंद कर दिए, जिसका फायदा बिचौलिए जम कर उठाए. बिचौलिए प्रसाशन से आंख मिचौली कर भारी मात्रा में ओडिशा के धान खपाने कामयाब हो गए. 1800 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर पिकअप और ट्रैक्टरों से बिचौलिए घर पहुंच सेवा दिए.
कार्रवाई की रिकॉर्ड बताते हैं कि एसडीएम ने ऐसे 27 मामले दर्ज किए, जिसमें 14 वाहन धान परिवहन करते पकड़ाए. बाकी खलिहानों में लवारिश जब्त किए गए. पूरी ताकत लगाने के बाद केवल 2 हजार 335 बोरी अवैध धान जब्त किया, जबकि सूत्रों की दावे के मुताबिक 30 से 50 हजार बोरा ओडिशा का धान देवभोग के अलावा मैनपुर ब्लॉक के गोहरापदर और अमलीपदर इलाके के खरीदी केंद्रों में खपाया गया.
इन दो बड़ी वजहों से खप जाता है ओडिशा का धान
1-गिरदावरी में मिलीभगत
अवैध धान बिक्री को रोकने राजस्व विभाग सितम्बर माह से प्रत्येक रकबे का सत्यापन कराता है, जिसे गिरदावरी कहते हैं. किसान के फसलवार रकबे का पंजीयन कर दिया जाता है, लेकिन कुछ लोग मक्का और अन्य फसल पैदावारी करने के बावजूद पटवारी की रिपोर्ट में धान फसल बताने कामयाब हो जाते हैं. इन्ही रकबे पर ओडिशा का धान खप जाता है.
2-उत्पादन में कमी
औसत उत्पादन 10 से 12 क्वीन्टल प्रति एकड़ है. 30 फीसदी रकबे तो ऐसे हैं, जहां बारिश के प्रभाव के कारण उत्पादन 8 क्विंटल तक सिमट जाता है. असिंचित रकबे में 15 क्विंटल तक किसान बेच सकता है. उत्पादन की भरपाई करने किसान बिचौलिए का सहारा लेते हैं.
13 चेक पोस्ट से रोकेंगे ओडिशा का आवक
एसडीएम अर्पिता पाठक ने कहा कि 13 चेक पोस्ट बनाए जा रहे हैं. ड्यूटी का ऑर्डर भी निकाल दिया गया है. समर्थन मूल्य में धान खरीदी शुरू होते ही चेक पोस्ट पर कर्मी तैनात हो जाएंगे. फिर भी कोई सूचना मिलती है तो आवश्यक कार्रवाई होगी.
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