रायपुर। छत्तीसगढ़ की मिट्टी, जलवायु और किसानों की मेहनत ने इस राज्य को देश के अग्रणी धान उत्पादक राज्यों में प्रमुख स्थान दिलाया है। लेकिन राज्य में साय सरकार से पहले वर्षों तक यह विडंबना रही कि जो किसान देश का पेट भरता था, वही आर्थिक अभाव, कर्ज़ के बोझ और अस्थिर आय से जूझता भी रहता था। धान की लागत तो बढ़ रही थी लेकिन उसका उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान हताश हो चुका था। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा शुरू की गई ‘कृषक उन्नति योजना’ राज्य के किसानों के लिए संजीवनी के समान सिद्ध हुई है। इस योजना ने न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाई है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता, सम्मान और सुरक्षा की राह पर भी अग्रसर किया है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दूरदर्शी नेतृत्व
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जब यह निर्णय लिया गया कि किसानों को धान का मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल दिया जाएगा, तो पूरे राज्य में आशा और उत्साह की नई लहर दौड़ गई। अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती (25 दिसंबर) पर की गई यह घोषणा केवल एक राजनीतिक वादा नहीं थी, बल्कि प्रदेश के अन्नदाताओं के प्रति एक गहरा सम्मान और प्रतिबद्धता का प्रतीक थी।12 मार्च 2024 को औपचारिक रूप से लागू हुई कृषक उन्नति योजना ने यह स्पष्ट कर दिया कि नई सरकार की प्राथमिकता किसान हैं। मुख्यमंत्री साय ने बार-बार कहा है कि “जब हमारा किसान मजबूत होगा, तभी छत्तीसगढ़ मजबूत होगा।” उनके इसी संकल्प ने इस योजना को राज्य की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कृषि पहल बना दिया है।

योजना की मुख्य विशेषताएं
कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा किए गए प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं। 3100 रुपए प्रति क्विंटल धान खरीदी दर, अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी सीमा, पहले MSP के अनुसार भुगतान फिर शेष राशि आदान सहायता के रूप में DBT के जरिए किया जाना, सहकारी समितियों में धान बेचने वाले पंजीकृत किसान अन्य फसलों पर प्रोत्साहन, धान के अलावा अन्य फसलें (जैसे दलहन, तिलहन, मक्का) उगाने पर ₹10,000 प्रति एकड़ की अतिरिक्त सहायता। डिजिटल व्यवस्था: “टोकन तुहर हाथ” ऐप और माइक्रो एटीएम की शुरुआत यह पूरी प्रक्रिया किसान के हितों को ध्यान में रखकर सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाई गई है।
15 से 21 क्विंटल की बढ़ी खरीदी सीमा से बढ़ा किसानों का आत्मविश्वास
पहले एक किसान से प्रति एकड़ केवल 15 क्विंटल धान खरीदा जाता था। इससे अधिक उत्पादकता होने पर भी किसान अपनी पूरी उपज नहीं बेच पाता था। लेकिन कृषक उन्नति योजना के तहत यह सीमा बढ़ाकर 21 क्विंटल प्रति एकड़ कर दी गई है। इस बदलाव से किसान अधिक धान बेच पा रहे हैं उन्हें उनकी मेहनत का पूरा फल मिल रहा है।खेती अब किसानों के लिए घाटे का सौदा नहीं रही। कृषक उन्नति योजना यह निर्णय छोटे और मध्यम किसानों के लिए विशेष रूप से वरदान साबित हुआ है।

DBT से सीधा पैसा, बिना बिचौलिया
छत्तीसगढ़ की साय सरकार के दिशा निर्देश पर कृषक उन्नति योजना के तहत Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली लागू की गई है। इसमें धान बेचने के 72 घंटे के भीतर ही पैसा किसान के बैंक खाते में पहुंचा दिया जाता है। इस प्रणाली से होने वाले फ़ायदों में है, बिचौलियों से मुक्ति, भ्रष्टाचार पर रोक, समय पर भुगतान और किसानों को आर्थिक सुरक्षा।इस प्रणाली में हर लेन-देन पारदर्शी और ऑनलाइन है।

“टोकन तुहर हाथ”- किसानों के लिए डिजिटल क्रांति
इस योजना के साथ शुरू किया गया ‘टोकन तुहर हाथ’ ऐप किसानों के लिए नवाचार की मिसाल बन गया है। इस ऐप के जरिए किसान ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकते हैं धान बेचने की तारीख तय कर सकते हैं। अपनी बिक्री और भुगतान की जानकारी देख सकते हैं। यह पहल छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र को डिजिटल युग में ले जाने का एक बड़ा कदम है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया संचार
कृषक उन्नति योजना के तहत लगभग 13,320 रुपये करोड़ की आदान सहायता राशि सीधे किसानों के खातों में स्थानांतरित की गई है।इसके परिणमस्वरूप गांवों में नकदी का प्रवाह बढ़ा छोटे व्यापारियों की आमदनी में वृद्धि हुई कृषि उपकरण, बीज, खाद और सिंचाई साधनों की बिक्री बढी ग्रामीण बाजारों में रौनक लौटी। यह योजना केवल किसानों की ही नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण तंत्र के आर्थिक पुनर्जागरण की वजह बनी है।
रिकॉर्ड तोड़ धान खरीदी
धान खरीदी के आंकड़े कृषक उन्नति योजना की सफलता का स्पष्ट प्रमाण हैं। 2022-23 में 107.52 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 145 लाख मीट्रिक टन से अधिक की रिकॉर्ड ख़रीदी और 2024-25 में निर्धारित लक्ष्य 149 लाख मीट्रिक टन से अधिक की ख़रीदी के परिणामस्वरूप अब किसान उत्साहित होकर उत्पादन बढ़ा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलने लगा है।
प्रदेश की साय सरकार ने लाया इंफ्रास्ट्रक्चर में जबरदस्त सुधार
धान खरीदी केंद्रों पर अब पहले से कहीं अधिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। गोदामों की क्षमता में वृद्धि की जा रही है, बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों के बैठने, पानी और छाया की व्यवस्था के अलावा 2,800 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाएँ स्वीकृत की गई है। इससे कृषि का बुनियादी ढाँचा मजबूत हुआ है और किसान को बेहतर सुविधा मिल रही है।
फसल विविधीकरण को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ की साय सरकार सिर्फ धान पर निर्भरता नहीं चाहती। इसलिए दलहन, तिलहन और मक्का जैसी फसलों पर 10,000 रुपए प्रति एकड़ की अतिरिक्त सहायता दी जा रही है। इससे: भूमि की उर्वरता बनी रहेगी किसानों की आय के नए स्रोत बनेंगे राज्य की कृषि व्यवस्था संतुलित होगी।
आवेदन और पंजीकरण की बनाई गई आसान प्रक्रिया
कृषक उन्नति योजना का लाभ उठाने के लिए किसान को छत्तीसगढ़ का निवासी होना चाहिए उनका एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है गिरदावरी में फसल की पुष्टि होनी चाहिए, जानकारी और सहायता के लिए ग्राम पंचायत कृषि विस्तार अधिकारी टोल-फ्री नंबर: 1800-180-1551 पर उपलब्ध होते हैं इस तरह से यह प्रक्रिया अत्यंत सरल बना कर रखी गई है ताकि छत्तीसगढ़ का हर किसान इससे जुड़ सके।
किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव
इस योजना के कारण आज:किसान अपने बच्चों को अच्छे विद्यालय में भेज पा रहे हैं घर, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर जैसी सुविधाएं खरीद पा रहे हैं। कर्ज से मुक्ति पा रहे हैं। खेती को गर्व के पेशे के रूप में अपना रहे हैं कृषक उन्नति योजना ने वास्तव में किसान को “अन्नदाता से अर्थदाता” बना दिया है।
कृषक उन्नति योजना एक योजना नहीं बल्कि एक क्रांति है
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ के किसानों के सम्मान, सशक्तिकरण और स्वाभिमान की प्रतीक बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ और नीति मजबूत हो, तो किसान की जिंदगी बदली जा सकती है।आज छत्तीसगढ़ का किसान आत्मविश्वास से भरा हुआ है। उसके चेहरे पर मुस्कान है, उसके खेतों में खुशहाली है और उसके जीवन में उम्मीद की नई फसल लहलहा रही है। यह योजना आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को कृषि के क्षेत्र में देश का आदर्श राज्य बना सकती है। कृषक उन्नति योजना से खुल रहा किसानों की उन्नति का नया अध्याय।
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