रायपुर। हमारा देश आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल क्रांति, नई तकनीकों और युवाओं की ऊर्जा ने देश को नवाचार और उद्यमिता की दिशा में एक नई पहचान दी है। इसी तारतम्य में छत्तीसगढ़ भी अब अपनी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। लंबे समय तक खनिज संसाधनों और कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाने जाने वाला छत्तीसगढ़ अब ज्ञान आधारित और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा घोषित “छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30” परिवर्तन की इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। यह नीति एक ऐसा प्रशासनिक दस्तावेज है जो युवाओं के सपनों को पंख देने वाला एक व्यापक रोडमैप साबित हो रहा है। इस नीति का लक्ष्य आने वाले पाँच वर्षों में 5,000 से अधिक DPIIT-पंजीकृत स्टार्टअप्स को सशक्त बनाना है। इसके साथ ही 100 करोड़ रुपये का स्टार्टअप कैपिटल फंड और 10 लाख रुपये तक की सीड फंडिंग जैसे प्रोविजंस राज्य के इंनोवेशन ईको सिस्टम को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को संसाधन आधारित अर्थ व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए उसे नवाचार, तकनीक और उद्यमिता का केंद्र बनाना चाहती है।
नई अर्थव्यवस्था की ओर तेज़ी से बढ़ता छत्तीसगढ़
21वीं सदी की अर्थव्यवस्था, शत प्रतिशत ज्ञान, तकनीक और नवाचार पर आधारित है। विश्व भर में स्टार्टअप्स ने नई आर्थिक क्रांति को जन्म देने का काम किया है। हमारे देश में भी बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और दिल्ली जैसे शहर स्टार्टअप हब बन चुके हैं और अब छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जिनके पास नए विचार, तकनीकी ज्ञान और उद्यमिता की क्षमता तो है लेकिन अक्सर संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के कारण उनके सपने अधूरे रह जाते हैं। इस परिस्थिति में प्रदेश की नई स्टार्टअप नीति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह नीति न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है बल्कि मेंटॉरशिप, प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच और तकनीकी सहयोग जैसे कई आयामों पर काम कर रही है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कई अवसरों पर कहा है कि “छत्तीसगढ़ के युवाओं में अपार प्रतिभा है। यदि उन्हें उचित मंच और संसाधन मिल जाएं तो वे न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।”

छत्तीसगढ़ साय सरकार की स्टार्टअप नीति की प्रमुख विशेषताएँ
प्रदेश की नई स्टार्टअप नीति को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह स्टार्टअप को हर कदम पर सहायता प्रदान करे। नई स्टार्टअप नीति में Proof Of Concept (POC) वाले स्टार्टअप्स को 10 लाख रुपये तक की सीड फंडिंग की जाएगी। यह राशि उन युवाओं के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है जो अपने विचार को उत्पाद या सर्विस में बदलना चाहते हैं। इसके अलावा 100 करोड़ रुपये का स्टार्टअप कैपिटल फंड स्थापित किया गया है जिसे शुरुआत करने वाले और अपने काम का विस्तार चाहने वाले स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराई जा सकेगी।इस प्रावधान से उन युवा उद्यमियों को काफ़ी राहत मिलने वाली है जिन्हें शुरुआती निवेश के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
लोन और ब्याज सब्सिडी की व्यवस्था
अनुभव में आता है कि स्टार्टअप्स को वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में काफ़ी कठिनाईयाँ आती हैं। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए नई स्टार्टअप नीति में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। जैसे 1 करोड़ रुपये तक का बिना गारंटी लोन प्रदान करना। 50 लाख रुपये तक के बैंक लोन पर 75 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी दिया जाना। राज्य सरकार की यह व्यवस्था स्टार्टअप्स को जोखिम लेने का हौसला देगी और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करेगी।स्टार्टअप्स को लोन उपलब्ध कराने के लिए 50 करोड़ रुपये का क्रेडिट रिस्क फंड तैयार किया जाएगा।

रेडिट रिस्क फंड का उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों का जोखिम कम करना है ताकि वे नए उद्यमियों को आसानी से लोन प्रदान कर सकें। इस व्यवस्था से राज्य में निवेश का माहौल और अधिक मजबूत बनेगा। नई स्टार्टअप नीति का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य रोजगार सृजन है। यदि कोई स्टार्टअप 10 से अधिक लोगों को रोजगार देता है तो उसे विशेष शासकीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। महिला कर्मचारी के लिए 6000 रुपए प्रति माह वेतन अनुदान और पुरुष कर्मचारी के लिए 5000 रुपए प्रति माह वेतन अनुदान की व्यवस्था बनाई जा रही है।
नई स्टार्टअप नीति में कई प्रकार की सब्सिडी और कर छूट को भी शामिल किया गया हैं। स्टाम्प ड्यूटी पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। किराए पर 15,000 रुपए प्रति माह तक 40 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है, और नई स्टार्टअप नीति में पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन पर सब्सिडी दी जाएगी। नए स्टार्टअप्स को मिलने वाली यह सुविधाएँ निश्चित ही उनके शुरुआती लागत को कम करने में मदद करेंगी।लेकिन छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा तभीसम्पूर्ण मानी जा सकती है जब राज्य के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को भी समान अवसर मिलें। इस विचार को सम्मुख रखकर ही बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों में स्थापित इनक्यूबेटर्स को 10 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता देने का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार का यह कदम इन क्षेत्रों के युवाओं को भी उद्यमिता की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करेगा।

“अमृतकाल – छत्तीसगढ़ विजन 2047” की दिशा में आगे बढ़ता कदम
वर्ष 2047 में हमारा देश भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा।इस पुनीत अवसर को ध्याम में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने “अमृतकाल – छत्तीसगढ़ विजन 2047” का लक्ष्य निर्धारित किया है।नई स्टार्टअप नीति इसी विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसका उद्देश्य राज्य को आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक दृष्टि से मजबूत बनाना है। नई स्टार्टअप नीति के माध्यम से सरकार स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। किसी भी मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए शिक्षा संस्थान, उद्योग और सरकार के सहयोग की आवश्यक होती हैं। प्रदेश सरकार की नई स्टार्टअप नीति इन तीनों के बीच मजबूत सहयोग स्थापित करने का प्रयास करती है।
इसके लिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में इनोवेशन लैब, इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप क्लब स्थापित किए जा रहे हैं और उद्योग जगत और निवेशकों को भी इस ईको सिस्टम से जोड़ा जा रहा है।

इंनोवेशन की संस्कृति का विकास
नई स्टार्टअप नीति का उद्देश्य केवल कंपनियाँ बनाना नहीं है बल्कि इनोवेशन के कल्चर को डेव्हलप करना है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार चाहती है कि यहाँ का युवा नौकरी की तलाश करने वाला नही बल्कि नौकरी देने वाले उद्यमी बनें। इस भावना को बढ़ावा देने के लिए इसके लिए कई तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम, हैकाथॉन, स्टार्टअप प्रतियोगिताएँ और इनोवेशन चैलेंज आयोजित किए जा रहे हैं।
अत्याधुनिक तकनीकी अवसंरचना का किया जा रहा है विकास
वर्तमान परिवेश में तकनीक के बिना विश्व में कोई भी स्टार्टअप आगे नहीं बढ़ सकता। इसी के मद्देनज़र छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में अत्याधुनिक तकनीकी अवसंरचना विकसित करने पर भी ध्यान दे रही है। नया रायपुर (अटल नगर) को आईटी और स्टार्टअप हब के रूप में तेज़ी से विकसित किया जा रहा है।नया रायपुर में आईटी पार्क, डेटा सेंटर और इनोवेशन हब स्थापित किए जा रहे हैं।

सामाजिक और टिकाऊ समाधान को बढ़ावा दे रही नई स्टार्टअप नीति
नई स्टार्टअप नीति सामाजिक और टिकाऊ समाधानों को बढ़ावा देने वाली है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स को विशेष शासकीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। ऐसा करने से तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सकेगा।
आकार ले रहा है मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दूरदर्शी नेतृत्व
छत्तीसगढ़ राज्य की नई स्टार्टअप नीति के पीछे मुख्यमंत्री प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय का दूरदर्शी नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनकी सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि भविष्य में छत्तीसगढ़ को केवल खनिज संपदा वाला राज्य नहीं बल्कि ज्ञान और नवाचार के केंद्र के रूप में भी पहचाना जाएगा। राज्य के मुख्यमंत्री लगातार यह बात दोहराते रहे हैं कि राज्य के युवाओं को इतना अवसर मिलना चाहिए ताकि वे अपने विचारों को व्यवसाय में बदल सकें। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेहद सरल बनाया है, जिससे निवेशकों को प्रोत्साहन मिला है और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

नई स्टार्टअप नीति 2025-30 में ग्रामीण और आदिवासी युवाओं के लिए अवसर
छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे बड़ी ताकत उसके ग्रामीण और आदिवासी युवा हैं। नई स्टार्टअप नीति इन युवाओं को भी उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास करती है। कृषि आधारित उद्योग, वन उत्पाद आधारित उद्यम, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार के इस कदम से इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यदि यह नीति अपने लक्ष्य के मुताबिक़ सफल होती है तो निश्चित तौर पर अगले पाँच वर्षों में छत्तीसगढ़ में हजारों नए स्टार्टअप्स स्थापित होंगे और इनके माध्यम से लाखों रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था में भी नई ऊर्जा आएगी।संक्षेप में यही कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की नई स्टार्टअप नीति प्रदेश के युवाओं के सपनों, नवाचार और आत्मनिर्भरता का एक घोषणापत्र है।

