China Trade Surplus Surges: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन का ट्रेड सरप्लस साल 2025 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.19 ट्रिलियन डॉलर (करीब 100 लाख करोड़ रुपये) हो गया है. यह 2024 की तुलना में करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है. महंगाई को समायोजित करने के बाद भी यह अब तक किसी भी देश द्वारा दर्ज किया गया सबसे बड़ा ट्रेड सरप्लस माना जा रहा है.

चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले दिसंबर महीने में चीन ने 114.14 अरब डॉलर (करीब 10.31 लाख करोड़ रुपये) का ट्रेड सरप्लस दर्ज किया. यह चीन के इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा मासिक सरप्लस है. एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के बीच के अंतर को ही ट्रेड सरप्लस कहा जाता है.

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China Trade Surplus Surges
China Trade Surplus Surges

दूसरे देशों के रास्ते अमेरिका पहुंच रहा चीनी सामान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी सामान पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इससे अमेरिका और चीन के बीच सीधा व्यापार जरूर घटा, लेकिन चीनी कंपनियों ने इसका विकल्प निकाल लिया. अब चीन का सामान दक्षिण-पूर्व एशिया और दूसरे देशों के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा है.

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चीन लगातार घटा रहा है विदेशी सामान का इंपोर्ट

चीनी सरकार आत्मनिर्भरता की नीति पर जोर दे रही है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है. इस नीति को अक्टूबर में घोषित की गई पांच साल की आर्थिक योजना में भी शामिल किया गया है, जो साल 2030 तक लागू रहेगी. चीन ने साल 1993 के बाद कभी भी ट्रेड डेफिसिट का सामना नहीं किया है.

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कमजोर करेंसी और घरेलू मंदी ने बढ़ाया एक्सपोर्ट

चीन की मुद्रा रेनमिनबी इस समय कमजोर बनी हुई है. इससे विदेशी खरीदारों के लिए चीनी सामान सस्ता हो गया है, जबकि चीन के लिए इंपोर्ट महंगा हो गया है.

इसके अलावा, रियल एस्टेट सेक्टर में आई बड़ी गिरावट के कारण कई आम परिवारों की बचत खत्म हो गई है. लोग अब कार और कॉस्मेटिक्स जैसे विदेशी उत्पादों पर खर्च नहीं कर पा रहे हैं. घरेलू मांग कम होने से फैक्ट्रियों में बना सामान अब बड़े पैमाने पर विदेशों में भेजा जा रहा है.

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China Trade Surplus Surges: IMF की चेतावनी, सिर्फ एक्सपोर्ट के भरोसे नहीं चल सकता चीन

IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने पिछले महीने बीजिंग में चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि चीन अब इतना बड़ा हो चुका है कि वह सिर्फ एक्सपोर्ट के दम पर अपनी GDP नहीं बढ़ा सकता. IMF ने सलाह दी है कि चीन को अपनी करेंसी मजबूत करनी चाहिए और घरेलू खपत बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर वैश्विक स्तर पर ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ सकता है.

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ट्रेड सरप्लस क्या होता है?

सरल शब्दों में, जब कोई देश दूसरे देशों को सामान बेचकर जितना कमाता है, वह अगर दूसरे देशों से सामान खरीदने पर किए गए खर्च से ज्यादा होता है, तो उसे ट्रेड सरप्लस कहा जाता है. चीन का 1.19 ट्रिलियन डॉलर का सरप्लस बताता है कि उसने दुनिया से जितना खरीदा, उससे करीब 100 लाख करोड़ रुपये ज्यादा कमाए.

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जापान और जर्मनी से कहीं आगे चीन

चीन का मौजूदा ट्रेड सरप्लस अब तक के सभी रिकॉर्ड से कहीं बड़ा है. साल 1993 में जापान का ट्रेड सरप्लस आज के हिसाब से करीब 214 अरब डॉलर था. वहीं, 2017 में जर्मनी का रिकॉर्ड 364 अरब डॉलर रहा. चीन ने इन दोनों देशों को 3 से 5 गुना पीछे छोड़ दिया है.

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