झारखंड के बोकारो में BSL के विस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया, जिसके दौरान 3 अप्रैल को सीआईएसएफ ने उन पर लाठीचार्ज किया. CISF द्वारा की गई लाठीचार्ज की घटना में प्रेम महतो नामक एक विस्थापित की मृत्यु हो गई. इस घटना के पश्चात बेरमो के विधायक ने राज्य सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर एक पोस्ट में कहा कि बोकारो में बीएसएल के विस्थापित आंदोलनकारियों पर हुए लाठीचार्ज में एक युवक की मृत्यु की सूचना से उनका मन दुखी है. आंदोलनकारी कल प्रशासन के साथ बातचीत करना चाहते थे, लेकिन यह संभव नहीं हो सका.
जिला प्रशासन और सेल प्रबंधन को यह समझना आवश्यक था कि किसी भी आंदोलन को दमन के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता. राज्य सरकार को इस घटना की गहन जांच करनी चाहिए और बोकारो जिला प्रशासन तथा सेल प्रबंधन के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए. इसके साथ ही, सेल प्रबंधन को पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और रोजगार प्रदान करना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
बीएसएल के विस्थापित प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि उन्होंने अपनी भूमि बीएसएल को सौंपी थी, लेकिन अब तक उन्हें कोई रोजगार नहीं मिला है. इसी मुद्दे को लेकर वे एडीएम बिल्डिंग के निकट प्रदर्शन कर रहे थे.
प्रदर्शन के समय, नाराज प्रदर्शनकारियों ने एडीएम बिल्डिंग के निकट बीएसएल प्रबंधन से मिलने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया. इस घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ गई. हालात को संभालने के लिए सीआईएसएफ ने लाठीचार्ज किया, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग घायल हुए. इस दौरान 26 वर्षीय प्रेम महतो की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई.
सीआईएसएफ (CISF) की ओर से लाठीचार्ज की घटना में युवक की मौत्के के बाद इलाके में तनाव है. आक्रोशित विस्थापितों ने मृतक के परिजनों के लिए मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है.
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