आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर में बाघ की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि के बाद अब असली चुनौती जंगल नहीं, बल्कि सोशल मीडिया बनता जा रहा है. बीते कुछ दिनों से बाघ को पकड़ने का दावा करते हुए एक वीडियो तेजी से वायरल किया गया, जिस पर वन विभाग ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है. ऐसी झूठी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
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गौरतलब है कि वन विभाग ने पहले ही यह पुष्टि की थी कि सीतानदी वन्यजीव अभ्यारण से एक बाघ बस्तर क्षेत्र में आया था. तोकापाल ब्लॉक के खंडियापाल गांव में बाघ के पंजों के निशान मिलने के साथ कुछ मवेशियों के शिकार की भी जानकारी सामने आई थी. विभागीय सूत्रों के अनुसार, बाघ अब इंद्रावती टाइगर रिजर्व के इलाके में मूव कर चुका है.

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर बाघ पकड़ने का वीडियो वायरल हुआ. जिसने ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया. वीडियो के साथ यह दावा किया गया कि कुरंदी जंगल में वन विभाग की टीम ने बाघ को पकड़ लिया है. हालांकि, इस वीडियो को सच्चाई से परे बताते हुए वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इसका बस्तर या किसी भी वन क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है.
एसडीओ जगदलपुर देवलाल दुग्गा ने साफ शब्दों में कहा कि बाघ से जुड़ी झूठी जानकारी फैलाकर लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है, और ऐसे लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या सूचना को बिना पुष्टि साझा न करें और अफवाहों से दूर रहें.
एसडीओ का संदेश –
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