सुदीप उपाध्याय, बलरामपुर। जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुए विवाद का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प, मारपीट और गंभीर आरोपों के बाद अब वन विभाग के उच्च अधिकारी भी सामने आ गए हैं। इस पूरे मामले में वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ झड़प, मारपीट और अभद्रता करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल मामला रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के पंडरी गांव के केनवारी क्षेत्र का है, जहां ग्रामीणों द्वारा वन भूमि पर रातोंरात अवैध कब्जा कर लिया गया था। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने वन भूमि पर दुकानें और अस्थायी ढांचे खड़े कर दिए थे। सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला अतिक्रमण हटाने शनिवार को मौके पर पहुंचा।

कार्रवाई शुरू होते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और बात धक्का-मुक्की व मारपीट तक पहुंच गई। आरोप है कि ग्रामीणों ने रेंजर शिवनाथ ठाकुर सहित कई वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहा।

पुलिस की दखल से संभली स्थिति

स्थिति बिगड़ते देख पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

ग्रामीणों के आरोप

ग्रामीणों ने रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रेंजर ने पहले उनसे पैसे लेकर वन भूमि पर कब्जा करवाया और अब वही कब्जा हटाने पहुंचे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जितना पैसा दिया जाता था, उतनी जमीन पर कब्जा करवाया जाता था। इसी कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने वन भूमि पर दुकानें लगाकर अतिक्रमण किया था।

वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान जिन लोगों ने रेंजर और वन विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ झड़प, मारपीट और अभद्रता की है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
उन्होंने यह भी संकेत दिए कि पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और आवश्यक जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कई सवाल अब भी बाकी

हालांकि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि रेंजर पर लगाए गए पैसे लेकर कब्जा कराने के आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या इस दिशा में कोई अलग से जांच बैठाई जाती है।

फिलहाल प्रशासन और वन विभाग की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जांच और कार्रवाई के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।

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