MP उपचुनाव: रैगांव सीट पर बीजेपी और कांग्रेस में कांटे की टक्कर, जानिए क्या है विधानसभा के जातिगत समीकरण

वेंकटेश द्विवेदी, सतना। मध्य प्रदेश की खंडवा लोक सभा के अलावा 3 विधानसभा में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. जिसमें से सतना जिले की रैगांव विधानसभा का चुनाव बेहद ही दिलचस्प होने वाला है. यहां हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 13 दिन के अंदर 4 सभाएं एवं जन दर्शन यात्रा कर दो दर्जन से अधिक ग्रामवासियों से रूबरू हुए थे. साथ ही योजनाओं और घोषणाओं की बौछार कर चुनावी शमा बांधने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी.

BJP का गढ़ रहा रैगांव

वैसे तो रैगांव विधानसभा बीजेपी का गढ़ रही है. जहां 1993 से लगातार बीजेपी का परचम रहा है और 4 बार लगातार स्व. जुगुल बागरी विधायक रहे. वहीं 2013 में उनके बेटे पुष्पराज बागरी को बीजेपी से टिकट मिला था, लेकिन वे चुनाव हार गए थे और बीएसपी की उषा चौधरी को जीत हासिल हुई थी. पार्टी ने 2018 में एक बार फिर जुगुल बागरी को टिकट दिया और वो चुनाव जीते थे. इस तरह इस विधानसभा मे 5 बार बीजेपी को मौका मिला. अभी हाल ही महीने में जुगुल बागरी के देहांत के बाद सीट रिक्त हुई है. जिसपर अब उपचुनाव होना है.

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रैगांव का जातीय समीकरण

रैगांव विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण की बात करें तो सामान्य वर्ग के लगभग 83 हजार वोटर, पिछड़ा वर्ग के 27 हजार वोट हैं. अनुसूचित जाति की 77 हजार एवं अनुसूचित जनजाति के 22 हजार मतदाता हैं. वर्तमान में इस विधानसभा में कुल 2 लाख 6 हजार 910 मतदाता हैं. जातीय समीकरण पर गौर करें तो सामान्य वर्ग का मतदाता हमेशा से निर्णायक साबित रहा है. रैगांव विधानसभा वैसे बीजेपी का गढ़ रही है, लेकिन यहां से एक मर्तबा 1985 में कांग्रेस से रामाश्रय बागरी तो दूसरी बार 2013 में बीएसपी की उषा चौधरी ने जीत दर्ज की थी. वहीं बीजेपी के जुगुल बागरी पांच बार भाजपा से विधायक बने. वे 1993 में पहली, 1998 में दूसरी, 2003 में तीसरी, 2008 में लगातार चौथी बार विधायक बनकर इतिहास रचा था. हालांकि 2013 में बढ़ती उम्र को देखते हुए पार्टी ने उनकी जगह बड़े बेटे पुष्पराज बागरी को टिकट दिया था, लेकिन बसपा की उषा चौधरी से पुष्पराज हार गए थे. इसके बाद एक बार फिर जुगुल बागरी पर ही पार्टी ने भरोसा जताया तो 2018 में पांचवी बार विधायक बने. वे 2003 में उमा भारती की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, लेकिन एक लोकायुक्त के प्रकरण के कारण मंत्री पद गंवाना पड़ा था.

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विकास को तरस रही विधानसभा

बीजेपी का गढ़ होने के बावजूद 20 सालों में क्षेत्र विकास की राह तकता रहा. सड़क और बिजली इस क्षेत्र की मुख्य समस्या रही. यही वजह है कि मुख्यमंत्री को 13 दिन के अंदर दो बार जनदर्शन दौरा किया और सड़क बिजली की सौगातें देकर डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया है. भाजपा ने जहां सांसद गणेश सिंह, राज्यमंत्री रामखिलावन पटेल, बिसाहूलाल सिंह और विधायक शरतेंदु तिवारी को रैगांव सीट की जिम्मेदारी है.

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कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर

इस विधानसभा में मुख्य रूप से बीजेपी-कंग्रेस के बीच मुकाबला रहेगा. यहां से कांग्रेस की प्रबल दावेदार कल्पना वर्मा, उषा चौधरी, प्रभा जीतू बागरी एवं गया बागरी माने जा रहे हैं. वहीं बीजेपी से प्रबल दावेदारों में स्व जुगुल बागरी के बड़े बेटे पुष्पराज बागरी, छोटे बेटे देवराज बागरी, रानी बागरी प्रतिमा बागरी एवं सत्य नारायण बागरी हैं. जबकि बीएसपी की उषा चौधरी के कांग्रेस में जाने के बाद फिलहाल बीएसपी इस क्षेत्र से चुनाव लड़ती नहीं दिख रही है.

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पिछले चुनाव में इतने मिले थे वोट

बता दें कि बीते चुनाव 2018 में रैगांव सीट में कुल 45 प्रतिशत वोट पड़ थे. जिसमें भाजपा प्रत्याशी जुगल किशोर बागरी को 65910 वोट मिले थे और विजयी घोषित हुए थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी कल्पना वर्मा को 48489 वोट से द्वितीय स्थान पर थीं. इसके साथ ही बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी ऊषा चौधरी ने भी 12 हजार से ज्यादा वोट पाकर तीसरे पायदान पर जगह बनाई थी. फिलहाल देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री की लगातार हुई सभा में घोषणाएं क्या क्षेत्र के अधूरे विकास पर डैमेज कंट्रोल कर बीजेपी के पक्ष में माहौल बना
पाएगी. कामयाब होगी या फिर जनता इस बार किसी अन्य पार्टी को क्षेत्र के विकास के लिए मौका देगी.

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