कुंदन कुमार, पटना। सीएम नीतीश के एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद से बिहार कि सियासत में हलचल तेज है। इस बीच 9 अप्रैल को दिल्ली जाने से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 8 अप्रैल को कैबिनेट की एक अहम बैठक बुलाई है। सूत्रों के अनुसार सीएम नीतीश की यह कैबिनेट बैठक अंतिम कैबिनेट बैठक होगी। इस बैठक में सीएम नीतीश कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगा सकते हैं।
यह भी खबर सामने आ रही है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेगें। इसके साथ ही पटना लौटने के बाद वह मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे देंगे।
सम्राट हो सकते हैं बिहार के अगले ‘चौधरी’
नीतीश के राज्यसभा जाने और सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद बिहार की सियासत में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। बिहार की राजनीति में जहां, पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री पद पर कब्जा होने की उम्मीद है। वहीं, डिप्टी सीएम पद जदयू के खाते में आ सकता है। सूत्रों की मानें तो सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। वहीं, जदयू से कोई नेता डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि गृह विभाग किसके पास होता है। यह देखना भी दिलचस्प होगा, जो अभी डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास है। जदयू की नजर उसपर जरूर होगी।
निशांत को सीएम बनाने की मांग
सीएम नीतीश के बेटे निशांत कुमार हालही में जदयू में शामिल हुए हैं। पार्टी में शामिल होने के बाद से वह लगातार एक्टवि नजर आ रहे हैं। इस दौरान वह मीडिया से भी मुखातिब हो रहे हैं और अपनी बातों को सामने रख रहे हैं। नीतीश के एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद जदयू के कई नेताओं ने खुलकर निशांत कुमार को बिहार का सीएम बनाने की मांग की है। कल 4 अप्रैल को भी जदयू कार्यालय के बाहर निशांत के समर्थन में एक पोस्टर लगाया गया था, जिसमें उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई थी।
नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर
नीतीश कुमार के सियासी करियर में यह पहला मौका होगा, जब उनके जीवन में इतना लंबा उतार-चढ़ाव होने जा रहा है। बता देंकि नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए और कई बार सांसद भी चुने गए। केंद्र सरकार में उन्होंने रेल मंत्री सहित कई अहम पदों की भी जिम्मेदारी निभाई।
नीतीश कुमार 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा सांसद बने। वहीं, साल 2005 में नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद से ही वे राज्य की राजनीति का केंद्र रहे और बिहार की सियासत उनके आस-पास ही रही। हालही में हुए 2025 में भी नीतीश कुमार के चेहरे पर एनडीए की प्रचंड बहुमत की सरकार बनी। हालांकि राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित होने के बाद अब वे एक बार फिर दिल्ली की राजनीति की ओर हैं।
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