Bihar Politics: सीएम नीतीश कुमार ने आज सोमवार (30 मार्च) को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही अब यह तय हो गया कि वे राज्यसभा जाएंगे। नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं। सीएम पद से इस्तीफा देने के साथ ही बिहार की राजनीति से नीतीश युग का भी अंत हो जाएगा। नीतीश कुमार दो दशक (20 साल) तक बिहार की सत्ता में शिखर पर रहें। इस दौरान बहुत कुछ बदला…लेकिन सीएम की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही विराजमान रहें।
पहले चुनाव में मिली थी हार
नीतीश कुमार के सियासी करियर में यह पहला मौका होगा, जब उनके जीवन में इतना लंबा उतार-चढ़ाव होने जा रहा है। नीतीश कुमार ने 1977 में पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि उस वक्त उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1985 में उन्होंने हरनौत विधानसभा सीट से जीत हासिल कर सक्रिय राजनीति में मजबूत वापसी की। इसके बाद 1989 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे और केंद्र की राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी की स्थापना कर उन्होंने बिहार की राजनीति में नई दिशा देने की कोशिश की, हालांकि शुरुआती दौर में पार्टी को सीमित सफलता मिली।
अटल सरकार में मिली थी रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी
1996 के बाद नीतीश कुमार का कद लगातार बढ़ता गया और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने रेल, कृषि और भूतल परिवहन जैसे अहम मंत्रालय संभाले। 1999 में गैसल ट्रेन हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके कार्यकाल में ही रेलवे में तत्काल टिकट बुकिंग की शुरुआत हुई, जिसे आम लोगों ने काफी सराहा।
2000 में सिर्फ 7 दिनों के लिए बने मुख्यमंत्री
साल 2000 में नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण उन्हें सिर्फ सात दिन में ही इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद 2005 में भाजपा के समर्थन से उन्होंने दोबारा सत्ता हासिल की और फिर 2010 में भी जनता ने उन्हें स्पष्ट जनादेश दिया।
हालांकि 2014 में लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया और जीतनराम मांझी को जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन 2015 में महागठबंधन के साथ बड़ी जीत के बाद वे फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बने। 2017 में तेजस्वी यादव पर लगे आरोपों के बाद उन्होंने महागठबंधन से अलग होकर एनडीए के साथ मिलकर नई सरकार बनाई।
10 बार सीएम पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड
2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू की सीटें कम होने के बावजूद एनडीए की जीत के बाद वे एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2022 में उन्होंने फिर पाला बदलते हुए महागठबंधन के साथ सरकार बनाई और आठवीं बार सीएम पद की शपथ ली। जनवरी 2024 में एक बार फिर उन्होंने महागठबंधन से दूरी बनाते हुए एनडीए में वापसी की और नौवीं बार मुख्यमंत्री बने। वहीं, 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक नया रिकॉर्ड बनाया। उनसे अधिक बार किसी भी नेता ने सीएम पद की शपथ नहीं ली है। नीतीश कुमार 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं।
बेटे निशांत को सीएम बनाने की मांग
नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बख्तियारपुर में हुआ था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने नौकरी भी की, लेकिन जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़कर राजनीति में आ गए। उनकी पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा का 2007 में निधन हो चुका है और उनके एक बेटे निशांत कुमार हैं, जिन्होंने हालही में जदयू की सदस्यता ली और अब राजनीति में सक्रिय नजर आ रहे हैं। जदयू के कई नेता उन्हें नीतीश कुमार की जगह निशांत को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की भी मांग कर रहे हैं।
बीजेपी का हो सकता है सीएम
फिलहाल, नीतीश कुमार के MLC पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। आने वाले दिनों में राज्य की सियासत में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खबरों की माने तो नीतीश के राज्यसभा जाने पर पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री देखने को मिल सकता। इनमें सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि, राजस्थान और मध्य प्रदेश की तरह बिहार में भी किसी नए चेहरे को बिहार का सीएम बनाकर बीजेपी एक बार फिर अपने फैसले से लोगों को चौंका सकती है।
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