मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुए विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान सामने आया है. सीएम ने नाम लिए कहा कि एक योगी, एक संत के लिए, एक सन्यासी के लिए धर्म व राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता, उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं होती.
योगी ने कहा कि एक संत के लिए धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है, राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. कोई धर्म के खिलाफ आचरण करता है, क्योंकि ऐसे बहुत कालनेमि होंगे जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे, हमें उनसे सतर्क रहना होगा. किसी को परंपरा बाधित करने का हक नहीं है. चार करोड़ लोगों ने 18 तारीख को माघ मेले से स्नान किया.
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बता दें कि इस मामले में पक्ष-विपक्ष की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हैं. बुधवार को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने शंकराचार्य के मामले में भाजपा पर निशाना साधा. अखिलेश यादव ने कहा है कि शंकराचार्य जी और सभी साधु-संत हम सब की शोभा हैं. तमाम अनुयायी उनसे मिलने और आशीर्वाद लेने आते हैं, यही सनातन धर्म की परम्परा है. भाजपा सनातन परम्परा को तोड़ रही है. साधु-संतों और शंकराचार्य जी को जानबूझकर अपमानित कर रही है. भाजपा सरकार ने शंकराचार्य जी और साधु-संतो के साथ दुर्व्यवहार किया है.
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