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अंबिकापुर। अजब इत्तेफाक है। प्रदेश में महिला कलेक्टरों को नई ज्वाइंनिंग के वक्त ऐसी असहज स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है जिससे कोई भी नहीं गुज़रना चाहेगा. व्हाट्सअप पर एक पोस्ट ने रायगढ़ कलेक्टर शम्मी आबिदी को ज्वाइन करने से पहले इस स्थिति में ला दिया था. अब खबर आ रही है कि सरगुजा की कलेक्टर किरण कौशल को भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा.

मामला किरण कौशल की ज्वाइनिंग के बाद का है. किरण कौशल बतौर सरगुजा कलेक्टर ज्वाइन करने के बाद मीडिया से मुख़ातिब थीं. यहां एक पत्रकार शराब के नशे में धुत्त होकर आया था. किरण कौशल इससे अनजान थीं. उन्होंने मीडियाकर्मियों से उनका परिचय पूछा. इससे पहले कि कोई पत्रकार कुछ बोल पाता. नशे में डूबे पत्रकार ने माइक चालू कर दिया. और पूछा ”मैडम मैं जानना चाहता हूं मैनपाट के मांझी समुदाय को लेकर आप क्या करेंगी.”

कलेक्टर को कुछ समझ नहीं आया. कलेक्टर किरण कौशन ने कहा कि पहले परिचय हो जाने दीजिए, फिर उसके बाद आपके सवाल का जवाब देती हूं. लेकिन जब किसी के सिर पर महुआ देवता सिर पर सवाल तो वो कहां किसी को कलेक्टर और एसपी समझता है. शराब पीने के बाद तो फटीचर भी खुद को कलेक्टर समझने लगता है. वो तो फिर भी रुतबेदार पत्रकार था।

उन्होंने कलेक्टर की बात को काटते हुए कहा ” लेकिन मैडम मैं जानना चाहता हूं…!”, उनका वाक्य पूरा होता इससे पहले मैडम को समझ में आ गया कि पत्रकार महोदय ऑफिस से नहीं सीधे ठेके से आए हैं. बाकी पत्रकार भी समझ गए कि टूल्ल हो चुके पत्रकार को न रोका गया तो फजीहत पूरी बिरादरी की होगी. सो एक वरिष्ठ पत्रकार ने बीच में टोककर बात की दिशा को बदल दिया .लेकिन तीन पव्वा लोडेड वो पत्रकार कहां खामोश रहने वाला था.

परिचय पूरा होने के बाद फिर से इस पत्रकार ने माइक ऑन कर लिया. और अपने सवाल को दोहराया,”मैडम मैं ये जानना चाहता हूं कि मैनपाट में आप मांझी जनजाति के लिए क्या करने…..”!.  बार-बार उसकी इस हरकत से कलेक्टर किरण कौशल परेशान हो गईं. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें. गुस्सा निकालें या फिर अनदेखी करें. गुस्सा निकालने पर ये खतरा था कि शराब पिया व्यक्ति कुछ ऐसा न कर दे जिससे कलेक्टर पद की गरिमा को ठेस पहुंचे। ऐसे हालात में उन्हें इस गरिमा को बचाए रखने के लिए उस पत्रकार के खिलाफ कड़ा कदम उठाना पड़ेगा जिसका असर स्थानीय मीडिया से संबंधों पर पड़ेगा.

असहज हो चुकीं  किरण कौशल ने दूसरा विकल्प चुना और उसे समझाया , ”मैं आप सभी लोगों के सवालों का जवाब दूंगी, पहले आप लोग सवाल तय कर लीजिए.

एक अन्य पत्रकार ने मामले को नई बात छेड़कर संभाला. ये बात जैसे ही खत्म हुई. पत्रकार महोदय के सिर पर चढ़े महुआ देव फिर से सक्रिय हो गए. उन्होंने माइक चेक करना शुरु कर दिया. माइक पर ‘हेलो- हेलो’ बोलने लगे.  कलेक्टर का चेहरा उतर गया. वो बेहद असहज हो चुकी थीं. सिवाय उस पत्रकार को नजरअंदाज़ करने के कोई चारा नहीं बचा था.

पत्रकार साथियों ने मामले की नज़ाकत को समझा और शराबी पत्रकार के ”हेलो-हेलो” बोलते ही दूसरे सवाल करने लगे. सवाल का जवाब खत्म हुआ तो दूसरे पत्रकार ने झट से दूसरा सवाल दाग दिया. लेकिन दो-तीन सवालों के बाद फिर से नशेबाज़ पत्रकार ने माइक फिर दबा दिया.

उसके हेलौ-हेलौ बोलने से पहले ही हालात से घबराए दूसरे पत्रकार ने अपना सवाल पूछ लिया. कलेक्टर सभी सवालों का जवाब दे रही थीं. शराब पिया पत्रकार सवाल- जवाब के बीच में माइक चालू करके ”हेलो-हेलो” कर रहा था. लेकिन सब उसकी अनदेखी कर रहे थे. जब उसे समझ में आ गया कि उसे कोई नहीं सुन रहा है तो वो कुर्सी को पुशबैक करके लंबा लेट गया और जम्हाई लेने लगा.

कलेक्टर किरण कौशल का ध्यान न चाहते हुए भी इसकी तरफ जा रहा था. एक शराबी अगर ये हरकत करता तो दूसरे उसे देखकर हंसते लेकिन सामने कलेक्टर थी इसलिए सबकी जान अटकी हुई थी. कहीं किसी को कलेक्टर उसका साथी न समझ लें इसलिए जिस लाइन में वो पत्रकार बैठा था. वहां से सब खिसककर दूसरे साइड बैठ गए.

वो पत्रकार इतनी शराब पिये हुए था कि जब वो नाश्ता कर रहा था तो आधे से ज्यादा खाने का सामान मुंह तक पहुंचने से पहले ज़मीन पर गिर जा रहा था. पत्रकार बीच-बीच में ऐसी हरकत कर रहा था जिससे कलेक्टर का ध्यान उधर जा रहा था. बेसुध पत्रकार कुर्सी पर करीब-करीब सो चुका था. वो कभी माइक पर हेलो बोलता. कभी जम्हाई लेता. कभी जेब से टूथपीक निकालकर दांत कुदेरता. जब उसकी अवांछनीय हरकतें बढ़ गई तो पत्रकारों ने उस मुलाकात को का कार्यक्रम वहीं खत्म कराना मुनासिब समझा.

हांलाकि इस पूरे समय में कलेक्टर किरण कौशल का संयम देखने वाला था और सभी पत्रकारों ने इसकी जमकर तारीफ की।