नितिन नामदेव, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज से कमिश्नरेट सिस्टम लागू हो गया. इस ऐतिहासिक बदलाव के मौके पर रायपुर SP दफ्तर में शहर की कमान सम्भालने वाले वे तमाम दिग्गज आईपीएस अधिकारियों का मिलन समारोह हुआ. इस खास मौके पर राज्य गठन से लेकर आज तक अपराध पर अंकुश लगाने वाले कप्तानों ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं. साथ ही CM विष्णुदेव साय की पहल पर शुरू हुई इस नई व्यवस्था का स्वागत करते हुए रायपुर पुलिस के नए सफर को अपनी शुभकामनाएं दीं.


एस.के. पासवान (पूर्व एसएसपी, रायपुर – 1992): “रायपुर में अब तक 49 पुलिस अधीक्षक अपनी सेवाएं दे चुके हैं. मैं उन सभी अधिकारियों को बधाई देता हूं. अब शहर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली शुरू हो गई है, जिससे आपराधिक तत्वों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव होगी. हम लंबे समय से इसकी आवश्यकता महसूस कर रहे थे. मुझे याद है, रायपुर पूरे भारत में एक ऐसा जिला रहा है जहां (अपेक्षाकृत) हिंसा नहीं हुई. उस दौर में सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होने के नाते मैंने सभी से कहा था कि छत्तीसगढ़ में कोई भी बड़ी बात हो तो मुझे सूचित करें. यहां की जनता और प्रेस का हमेशा से भरपूर सहयोग मिला है. आज पुराने साथियों से मिलकर बहुत खुशी हो रही है.”

वाई.के.एस. ठाकुर (पूर्व एसपी, रायपुर – 1994): “रायपुर शहर पुलिसिंग के लिए कभी चुनौती नहीं रहा, क्योंकि यहां पुलिसिंग की जड़ें बहुत मजबूत रही हैं. हालांकि, कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा. इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय धन्यवाद के पात्र हैं. मुझे अपना वह समय याद है जब मैं यहाँ एडिशनल एसपी था और ‘मुन्ना तिवारी एनकाउंटर’ हुआ था. वह रायपुर का पहला एनकाउंटर था. उस अपराधी ने हमारे हेड कांस्टेबल पर बम फेंककर उनका हाथ तोड़ दिया था. जब उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की गई, तब मुठभेड़ की स्थिति बनी. वह मेरे करियर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण था.”

अमित कुमार (एडीजी): “यह केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि व्यवस्था में एक वास्तविक परिवर्तन है. इस नई प्रणाली से पुलिस की जिम्मेदारी और अधिकार दोनों बढ़ेंगे. नए पुलिस अधिकारी भी इस टीम का हिस्सा बनेंगे. मेरी शुभकामनाएं हैं कि पुलिस विभाग जनता के विश्वास पर पूरी तरह खरा उतरे.”

डी.एम. अवस्थी (पूर्व डीजीपी): “यह एक ऐतिहासिक क्षण है. रायपुर एसपी ऑफिस से मेरा लगाव साल 1989 से है, जब मैं यहाँ एएसपी के पद पर तैनात था. इसके बाद मैं यहां एसपी, आईजी और फिर डीजीपी रहा. आज एडीजी अमित कुमार और लाल उमेद सिंह की पहल के कारण पुराने साथियों से मिलना हुआ, जो सुखद अनुभव है. 1989 से अब तक मैंने देखा है कि रायपुर हमेशा ऊर्जा से भरा शहर रहा है. आज पुलिस कमिश्नर सिस्टम का लागू होना शहर की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा और शुभ दिन है.”
आरिफ शेख (आईपीएस अधिकारी): “मेरा रायपुर में बतौर एसपी कार्यकाल काफी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि उसी दौरान कोरोना महामारी की शुरुआत हुई थी. रायपुर का पहला केस समता कॉलोनी में मिला था और तब काफी अफरा-तफरी का माहौल था. उस कठिन समय में जनता ने पुलिस का भरपूर सहयोग किया और पुलिस ने भी शानदार प्रदर्शन किया. आज रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट बनते देखना गर्व की बात है. रायपुर की जनता ने हमेशा पुलिस का समर्थन किया है और मुझे विश्वास है कि आगे भी यह सहयोग मिलता रहेगा.”


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