Lalluram Desk. वैशाख कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्य व्रत माना जाता है, जिसे करने से जीवन में सुख और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 अप्रैल को 1:16 बजे से प्रारंभ होकर 14 अप्रैल की रात 1:08 बजे तक रहेगी। वरुथिनी एकादशी का व्रत सोमवार, 13 अप्रैल को रखा जाएगा।

भगवान शिव की पूजा का भी महत्व

इस एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। यह शुभ एकादशी भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित मानी जाती है।इस दिन दान-पुण्य के कार्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। शास्त्रों में इस एकादशी व्रत का महत्व 10 हजार साल की तपस्या के बराबर बताया गया है।

पूजा का अभिजीत मुहूर्त

वरुथिनी एकादशी पर अभिजीत मुहूर्त का निर्माण हो रहा है। पंचांग के अनुसार यह मुहूर्त 11:56 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा। इस बीच में आप पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

वरुथिनी एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में हर महीने आने वाली दोनों एकादशियों का विशेष महत्व होता है, लेकिन वरुथिनी एकादशी को पापों से मुक्ति और सौभाग्य प्रदान करने वाली तिथि माना गया है। वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से भाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत करने वालों को कन्यादान के बराबर फल प्राप्त होता है। वरुथिनी एकादशी व्रत भक्तों को सभी प्रकार की विपत्तियों से बचाते हैं। साथ ही महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होने के साथ-साथ पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज को सुनाई थी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को इस कथा को सुनाया था। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस एकादशी का व्रत रखता है उसे भूत-पिशाच जैसी योनियों में जन्म लेने से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मरने के बाद स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।

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