कुंदन कुमार/पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद कांग्रेस अब नए रास्ते तलाशती दिख रही है। दो दिन पहले महागठबंधन की बैठक में कांग्रेस के चार विधायक शामिल नहीं हुए, जिससे अंदरूनी असहमति साफ दिखी। इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने 1 दिसंबर को सदाकत आश्रम में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसे आलाकमान ने निर्देशित किया है। बताया गया था कि उन्होंने पद से इस्तीफा दिया पर हाईकमान ने इसे मंजूर नहीं किया। अब इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि महागठबंधन में बने रहने से पार्टी को लाभ हो रहा है या नहीं। इसके बाद बड़ा फैसला संभावित है।

कांग्रेस एमएलसी ने कही ये बात

बैठक के बाद कांग्रेस एमएलसी समीर सिंह ने साफ कहा कि महागठबंधन विपक्ष की भूमिका को लड़ाई नहीं, जिम्मेदारी की तरह निभाएगा। उन्होंने कहा जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरेंगे, लेकिन सकारात्मक राजनीति करेंगे। वोट चोरी से जो सत्ता बनी है उसे जनता तक सच बताएंगे।

तेजस्वी ने बचाई अपनी सीट

राघोपुर सीट से तेजस्वी यादव ने 14,532 वोटों से जीत दर्ज की। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद मिली यह जीत उनके समर्थकों के लिए भावनात्मक पल थी। 17वीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहने का अनुभव भी उनके पक्ष में गया। नेता प्रतिपक्ष बनने के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री के बराबर अधिकार मिलते हैं नीति और फैसलों में सीधा हस्तक्षेप करने का अवसर।

महागठबंधन में इस बार बहुत कम विधायक

इस बार महागठबंधन महज 35 सीटों पर सिमट गया। आरजेडी को 25, कांग्रेस को 6, माले को 2, माकपा और इंडियन इन्क्लुसिव पार्टी को 1-1 सीट। दूसरी ओर एनडीए 202 सीटों के साथ भारी बहुमत में आ गया। अब महागठबंधन ने तय किया है-सदन से सड़क तक विपक्ष की आवाज तेज होगी।