इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) को अपने ऐतिहासिक मुख्यालय को लेकर बड़ा प्रशासनिक झटका लगा है। पार्टी को 24 अकबर रोड स्थित ऑफिस जल्द खाली करना पड़ सकता है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, एस्टेट विभाग ने बुधवार को नोटिस जारी कर पार्टी को 28 मार्च तक यह दफ्तर खाली करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इंडियन यूथ कांग्रेस के 5 रायसीना रोड स्थित कार्यालय के लिए भी इसी समयसीमा के साथ एक अलग नोटिस जारी किया गया है। इन नोटिसों के बाद कांग्रेस अब कानूनी और राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रही है। पार्टी अदालत से राहत की उम्मीद के साथ-साथ सरकार से समय मांगने की रणनीति भी बना रही है।

24 अकबर रोड स्थित यह बंगला करीब 48 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय रहा है और पार्टी की राजनीति का प्रमुख केंद्र बना रहा। हालांकि, इंडियन नेशनल कांग्रेस ने पिछले साल इंदिरा भवन (कोटला मार्ग) पर अपना नया दफ्तर शुरू कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद अकबर रोड परिसर को अभी तक खाली नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की कई अहम गतिविधियां अब भी 24 अकबर रोड से ही संचालित हो रही हैं।

एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पार्टी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का अध्ययन कर रही है और साथ ही सरकार से कुछ समय की मोहलत भी मांगने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस दौरान एक रणनीतिक रास्ता भी तलाश रही है। इसके तहत अशोक गहलोत या दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं को राज्यसभा लाकर उनके नाम पर बंगले का आवंटन कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। ऐसा करने से नियमों के तहत बड़े सरकारी आवास के आवंटन की पात्रता मिल सकती है, जिससे पार्टी को मौजूदा दफ्तरों को कुछ समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

ऐसे शिफ्ट होता गया कांग्रेस का ऑफिस

कांग्रेस पार्टी के संगठनात्मक इतिहास में उसके मुख्यालयों का हमेशा खास महत्व रहा है। नई दिल्ली में 10 जनपथ और 24 अकबर रोड के बीच वर्षों से एक गहरा और प्रतीकात्मक रिश्ता रहा है। एक-दूसरे के बेहद करीब स्थित ये दोनों परिसर लंबे समय तक कांग्रेस के “पावरहाउस” के रूप में काम करते रहे, जहां पार्टी की रणनीतिक बैठकों से लेकर बड़े राजनीतिक फैसले लिए जाते थे।

आजादी से पहले, मोतीलाल नेहरू का इलाहाबाद स्थित आनंद भवन कांग्रेस की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। 1947 में देश की आजादी के बाद कांग्रेस का मुख्यालय औपचारिक रूप से नई दिल्ली शिफ्ट हो गया, जिसके बाद 24 अकबर रोड और 10 जनपथ जैसे स्थान पार्टी की राजनीति के केंद्र बन गए।

1969 में जब कांग्रेस में पहली बड़ी फूट पड़ी, तो इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस का 7 जंतर मंतर स्थित कार्यालय पर नियंत्रण खत्म हो गया। इसके बाद इंदिरा गांधी ने विंडसर प्लेस में कांग्रेस के वफादार नेता एम.वी. कृष्णप्पा के घर पर अस्थायी पार्टी कार्यालय बनाया। इसके बाद 1971 में कांग्रेस का दफ्तर 5 राजेंद्र प्रसाद रोड पर शिफ्ट किया गया। फिर 1978 में पार्टी का मुख्यालय 24 अकबर रोड स्थानांतरित हो गया, जो बाद में दशकों तक कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा।

सिंघवी ने की आलोचना

अभिषेक मनु सिंघवी ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस इस फैसले को यूं ही नहीं मानेगी और सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी। अपने बयान में सिंघवी ने कहा, “यह अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित है, और इन नोटिसों के खिलाफ सभी कानूनी उपाय किए जाएंगे।”

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