पटना। बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर महागठबंधन के उम्मीदवार की हार के बाद कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने तीन विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। पार्टी की अनुशासन समिति ने इन विधायकों से दो दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
अनुपस्थिति से बिगड़ा महागठबंधन का खेल
प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव के अनुसार, 16 मार्च 2026 को हुए मतदान में विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेन्द्र प्रसाद और मनोज विश्वास नदारद रहे। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि इन विधायकों की जानबूझकर की गई अनुपस्थिति ही महागठबंधन की हार की मुख्य वजह बनी।
संपर्क से बाहर रहे विधायक
समिति ने खुलासा किया कि मतदान के दौरान तीनों विधायकों से मोबाइल के जरिए संपर्क साधने की हर संभव कोशिश की गई। न केवल उन्होंने फोन रिसीव करना बंद कर दिया, बल्कि बाद में उनके मोबाइल स्विच ऑफ पाए गए। इस रहस्यमयी व्यवहार ने क्रॉस वोटिंग या सोची-समझी अनुपस्थिति के संदेह को और गहरा कर दिया है।
सीटों का समीकरण और हार की वजह
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए हुए इस मुकाबले में NDA की 4 सीटें सुरक्षित थीं। असली जंग 5वीं सीट के लिए थी, जहां NDA के शिवेश कुमार और महागठबंधन (RJD) के अमरेंद्र धारी सिंह आमने-सामने थे। जीत के लिए 41 वोटों की दरकार थी।
विपक्ष को उम्मीद थी कि AIMIM और BSP के साथ मिलकर वे जादुई आंकड़ा छू लेंगे, लेकिन कांग्रेस के 3 और RJD के 1 विधायक (फैसल रहमान) की अनुपस्थिति ने विपक्ष का आंकड़ा महज 37 पर समेट दिया।
कड़ी कार्रवाई के संकेत
पार्टी ने इसे विश्वासघात की श्रेणी में रखा है। यदि दो दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इन विधायकों की प्राथमिक सदस्यता रद्द करने या उन्हें पार्टी से निष्कासित करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
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