महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती विधानसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. कांग्रेस ने इस सीट से अपना उम्मीदवार वापस लेने का फैसला किया है. कांग्रेस उम्मीदवार ने नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पहले अपना पर्चा वापस ले लिया. इसके साथ ही कांग्रेस इस उपचुनाव की दौड़ से बाहर हो गई है. हालांकि, सुनेत्रा पवार के सामने अब भी 20 से ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं.

महाराष्ट्र बारामती विधानसभा सीट के उपचुनाव से कांग्रेस ने अपनी प्रत्याशी को हटा लिया है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसका ऐलान किया। कांग्रेस ने बारामती से आकाश विश्वनाथ मोरे को उम्मीदवार बनाया था।

कांग्रेस ने पहले आकाश विश्वनाथ मोरे को उतारकर महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा दिया था। गुरुवार को जहां दिल्ली में सुनेत्रा पवार पार्थ पवार की राज्य सभा की शपथ के मौके पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश से मिली थीं तो वहीं दूसरी तरफ एमवीए में शामिल एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने कांग्रेस लीडरशिप से प्रत्याशी हटाने की अपील की थी।

महाराष्ट्र के बारामती उपचुनाव में कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए अपना उम्मीदवार वापस ले लिया है. राज्य में पार्टी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक मर्यादा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया. हालांकि, सुनेत्रा पवार के मैदान में होने के बावजूद चुनाव तय समय पर ही होगा, क्योंकि कई अन्य उम्मीदवार भी रेस में हैं.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम राज्य की राजनीतिक संस्कृति और मर्यादा को बनाए रखने के लिए उठाया गया है. उन्होंने यह भी साफ किया है कि वह किसी भी अन्य उम्मीदवार को समर्थन नहीं दे रही है.

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण अजित पवार का हाल ही में हुआ दुखद निधन बताया जा रहा है. अजित पवार, जो महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं में से एक थे, की मौत एक विमान हादसे में हो गई थी. उनके निधन के बाद बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है. सुनेत्रा पवार यहां से चुनाव लड़ रही हैं.

दरअसल, बारामती सीट से चुनाव लड़ रहीं डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने खुद कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क किया था. उन्होंने कई बार हर्षवर्धन सपकाल से बातचीत की और दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर उम्मीदवार वापस लेने का अनुरोध किया था.

23 अप्रैल को मतदान और 4 मई को मतगणना तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी. सपकाल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से किसी तरह का कोई दबाव नहीं था. कांग्रेस ने यह फैसला पूरी तरह अपनी सोच और परंपरा के आधार पर लिया है.

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