रायपुर। महासमुंद जिले में चौथी कक्षा की अर्द्धवार्षिक परीक्षा में पूछे गए विवादास्पद प्रश्न पर लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को पूर्णत: दोषी पाया है. संचालनालय के सवाल पर डीईओ ने स्वीकार किया कि प्रश्नपत्र उनके द्वारा दिये गये प्रश्न पत्र की प्रति के अनुरूप मुद्रित नहीं था, इसके बाद भी उन्होंने परीक्षा से पूर्व सुधार के लिए कोई कार्रवाई नहीं की.

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बता दें कि महासमुंद जिले में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा में एक सवाल पूछा गया था कि “मोना के कुत्ते का क्या नाम है?”इस सवाल के चार विकल्पों में ‘राम’ का नाम भी शामिल किया गया था. इसे विश्व हिंदू परिषद ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए डीईओ का पुतला जलाया था. इसके साथ ही मामले की कलेक्टर से शिकायत करते हुए सात दिन के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी थी.

इस मामले पर लोक शिक्षण संचालनालय ने संज्ञान लेते हुए डीईओ विजय कुमार लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. संचालनालय ने सवाल किया कि क्या कक्षा 4 के हिन्दी के प्रश्नपत्रों की तुलना कक्षा 4 के अन्य विषय प्रश्नपत्रों से यह ज्ञात नहीं हुआ था कि प्रश्नपत्र आपके द्वारा दिये गये प्रश्नपत्र की प्रति के अनुरूप मुद्रित नहीं है?

इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि 2 बार परीक्षा तिथियों में संशोधन होने की वजह से मुद्रण द्वारा प्राप्त सीलबंद पैकेट के प्रश्न पत्र से ही परीक्षा आयोजित की गई थी. इस पर संचालनालय ने माना कि अधिकारी ने प्रश्नपत्र उनके द्वारा दिये गये प्रश्न पत्र की प्रति के अनुरूप मुद्रित नहीं है, फिर भी उन्होंने सुधार के लिए कोई कार्रवाई नहीं की. इस आधार पर उन्हें दोषी पाया.

पहले ही जता चुके हैं खेद

संचालनालय के सवालों का जवाब देने से पहले ही मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने मीडिया से चर्चा में उक्त प्रकरण पर खेद जताते हुए आश्वस्त किया कि भविष्य में इस प्रकार की त्रुटि की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए आवश्यक सावधानियां बरती जाएगी. इसके साथ प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा.