संपादकीय : वसीम बरेलवी कहते हैं- “….किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता”- संदीप अखिल

भारत हमेशा से “तमसो मा ज्योतिर्गमय का उपासक रहा है. अंधकार से संघर्षो का भारत का एक समृद्ध इतिहास है. चाहे हो सामाजिक अंधकार हो या आध्यात्मिक अंधकार हो या फिर कोई पूर्व में किसी बीमारी से फैले महामारी का अंधकार हो, या प्राकृतिक आपदाओं की घनी घटाओं का अंधकार हो, भारत ने सदैव डटकर मुकाबला किया है और उस पर विजय प्राप्त किया है. सम्रग विश्व को समाधान दिया है. इतिहास इस बात का साक्षी है.

अभी पूरा विश्व कोरोना जैसी बीमारी के भीषण संक्रमण से जूझ रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर पूरा देश एक विलक्षण संकल्प के साथ एक जुटा है। वैचारिक भिन्नताएं भारत की अपनी आंतरिक बाते हैं. हमारे देश में मतभेद विचारों में हो सकता है पर विषम परिस्थितियों में मनभेद कभी नहीं रहता जो आपने देश के प्रत्येक प्रान्त में रह रहे लोगो के साथ आपने अनुभव किया होगा. ऐसे समय में पूरा भारत एक सूत्र में बंधा नज़र आता है. इसका परिचय सभी राजनीतिक दलों ने इस विषम परिस्थितियों में कराया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 5 अप्रैल को रात्रि 9:00 बजे दीप, मोमबत्ती, मोबाइल फ्लैश लाइट के माध्यम से भारत के सभी लोगों को अपने घरों में रह कर उचित स्थान से अंधकार को प्रकाश में बदलने का आव्हान किया है. इस समय घर की सभी लाईट बन्द करने की जो बात इसमें कही गई हो पूरे देश के लोगो को प्रयास से ऊर्जा संरक्षण का भी कार्य करेगी. वास्तव में यह प्रकाश की किरणों के माध्यम से अपने अस्तित्व का बोध के साथ उसका विस्तार है.

यह ऐसे समय में जब हमारे मन कई संशय हैं, भविष्य को लेकर मन में कई आशंकाएं हैं, इस भय के वातावरण में प्रधानमंत्री जी के इस प्रयास का उद्देश्य केवल हमसे संवाद के साथ इस बोझिल समय को सकारात्मक दिशा की ओर मोड़ना है. यह सुख की संभावनाओं की प्रखर रश्मि का आवाहन है. इस उपक्रम से भारत विश्व के मानचित्र में अपनी नई भूमिका अंकित करने जा रहा है. यह हमारी समृद्ध समृद्ध मान्यताओं का एकजुटता का शिलालेख सिद्ध होगा. 5 अप्रैल को सुख समृद्धि और प्रकाश के लिए वसुदेव कुटुंबकम की उदार अवधारणा को सिद्ध करते हुए इस प्रकाश संकल्प से विश्व को आलोकित कर एक नया सन्देश देने का हम सब प्रयास करेंगे.

अब ये सवाल है कि इसकी आवश्यकता क्या थी ? मैं आप को बताना चाहता हूं की भारत ही एक ऐसा देश है जो अमावस की उस रात जिसमे घनघोर अंधेरा होता है उसे अपने सामर्थ्य से दीपों के माध्यम से प्रकाशमय कर देता वो भारत का सामर्थ्य है. नासा ने जब एक बार दीपावली की रात का फोटो शेयर किया तो पूरा विश्व अचम्भित रह गया था. पूरा देश उत्तर से दक्षिण तक जगमगा रहा था. वैसे ही कोरोना के इस अंधकार के विरुद्ध भारत के एक संकल्प एक प्रकाश का आवाहन है जो हम 5 अप्रैल को रात 9 बजे करने जा रहे हैं.
इस मौके पर वसीम बरेलवी का यह शेर सबसे सटीक जान पड़ता है.

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा।
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता (वसीम बरेलवी)

संदीप अखिल
स्टेट न्यूज़ को-ऑर्डिनेटर
स्वराज एक्सप्रेस/ lalluram.com

 

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