Video: मोबाइल ऐप बताएगा कोरोना के संक्रमण से कहा है खतरा, NIT के छात्रों ने किया है तैयार, सरकार से मदद की अपील

राज्य सरकार तक प्रपोजल भेजने की तैयारी, इस डेटा बेस्ड एप पर सरकार ही कर सकती है काम. चीन को इसी तरह के ऐप के जरिए कोरोना पर काबू पाने में मिली है मदद.

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एनआईटी में पढ़ने वाले पांच छात्रों ने एक ऐसा ऐप तैयार किया है. जिसके जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि कोरोना से शहर के किस जगह पर खतरा है. आपको उधर जाने पर अलर्ट कर देगा. फॉरेन ट्रैवल हिस्ट्री या क्वॉरेंटाइन किए गए लोगों की जानकारी रियल टाइम के जरिए इसमें शो करेगा. इस एप को जितने लोग डाउनलोड करेंगे, उन्हें यह बताएगा कि किधर कोरोना से खतरा है. हालांकि यह एप अभी प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है, लेकिन सरकार की मदद से ही इसे चलाया जा सकता है. क्योंकि यह डाटा बेस्ड एप है और सरकार ही इस पर काम कर सकती है.

कोरोनो से खतरा होने पर करेगा अलर्ट

कोरोना मरीज आपके शहर या इलाके में किन-किन जगहों पर ट्रैवल कर रहा है, उसकी पूरी जानकारी इस ऐप में मिल जाएगी. इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को इस एप को डाउनलोड करना पड़ेगा, जिससे इसकी पूरी जानकारी मिल जाएगी. यदि आप शहर में कहीं घूम रहे है और उस एरिया में कोरोना से खतरा है, तो आपको अलर्ट कर देगा, आप तक मैसेज पहुंच जाएगा.

एप कैसे करेगा काम ?

इस एप में कुछ ऐसे फीचर है जिसके जरिए कई काम हो सकते हैं. इसके सबसे पहले आपको ऐप को डाउनलोड करना होगा. डाउनलोड करने के बाद सबसे पहले आपको अपना पूरा नाम-पता डालना होगा. जब कोई व्यक्ति जांच के लिए जाएगा और उसमें कोरोना पाए जाते हैं, तो डॉक्टर उनके मोबाइल में एप डाउनलोड कर देंगे. एक वेबसाइट बनाई जिसमें सरकार विदेश से लौटे व्यक्तियों की जानकारी, आइसोलेटेड किए गए व्यक्तियों की जानकारी फीड रहेगी. यदि वह व्यक्ति कहीं जाते हैं, तो इस एप से उस इलाके के लोगों को अलर्ट मिल जाएगा. जिससे दूसरा व्यक्ति उससे दूरी बनाकर रखेगा.

इकठ्ठा हुए लोग और वेंटिलेटर की भी देगी जानकारी

इस ऐप में यह भी सुविधा है कि किसी जगह पर 10 से 15 लोग इकठ्ठा है, तो इसकी जानकारी भी इस ऐप के जरिए लोगों को मिल जाएगी. सरकार के जरिए हॉस्पिटलों में कितने वेंटिलेटर भरे हुए हैं और कितने खाली हैं, इसकी जानकारी भी एप के जरिये बताई जा सकती है. इसके लिए सरकार से डाटा लेना पड़ेगा, लेकिन अभी सरकार से इस संबंध में कोई बातचीत नहीं हो पाई है. जल्द ही बात करने की कोशिश करेंगे या फिर मीडियो के जरिए सरकार तक यह खबर पहुंच जाए तो अच्छा रहेगा.

सरकार की मदद से लाया जा सकता है उपयोग में

एनआईटी के छात्र अमन वर्मा ने लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत में बताया कि चीन ने भी ऐप के जरिए वहां कोरोना वायरस को रोक पाने में मदद मिली है. चीन ने इसके लिए सभी नागरिकों को ऐप डाउनलोड करने की अनिवार्यता कर दी थी. जिससे सभी को यह जानकारी मिल जाती थी कि किधर कोरोना मरीज है या किधर इससे खतरा है. ऐसा ही हमारा एप है जिससे जहां ज्यादा खतरा है उसको देखकर अलर्ट कर सकते है. इसमें काफी खर्च लगेगा, जो हम उठा नहीं सकते. इसके लिए सरकार की मदद की जरूरत पड़ेगी.

सरकार एक बार जरुर करें ऐप का इस्तेमाल

अमन ने आगे बताया कि ऐप को सामाजिक दृष्टिकोण से बनाया गया है. इससे हमें प्रॉफिट नहीं चाहिए. कोरोना को लेकर जो चैन लगातार बढ़ रहा उसे तोड़ना हमारा मकसद है. जिसे यह एप तोड़ सकता है. उन्होंने सरकार से अपील की है कि यदि सरकार इस ऐप का इस्तेमाल करती है, तो कोरोना के बढ़ते चैन को तोड़ा जा सकता है. सरकार पहले इस ऐप को देखें, सोचे, समझे और उपयोग में लाएं. इसके बाद इसकी जरूरत को समझे.

पांच छात्रों की है टीम

इस एप को बनाने वाले पांच छात्र है, जो एनआईटी रायपुर में पढ़ाई कर रहे हैं. इलेक्ट्राकिन एंड टेलीकम्युनिकेशन चौथे सेमेस्टर के छात्र अमन वर्मा ने बताया कि उनके अलावा आर्यन सरकार, आयुष गांगुली, कौशिक मिश्रा और अमर अलावी ने मिलकर इस एप को बनाया है. जिसका नाम bubdy है.

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