बेगूसराय। कर्तव्य और सेवा की मिसाल पेश करने वाले बेगूसराय के दहिया गांव के लाल और CRPF जवान मुरारी झा (40) अब हमारे बीच नहीं रहे। लंबी बीमारी से जूझते हुए मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा इलाका ‘मुरारी झा अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा।
3 महीनों से चल रहा था गंभीर बीमारी का इलाज
स्वर्गीय अरविंद झा के सबसे छोटे पुत्र मुरारी झा पिछले तीन महीनों से मुंबई में इलाजरत थे। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हाल ही में उनका तबादला मुजफ्फरपुर किया गया था ताकि वे परिवार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के करीब रह सकें। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और सोमवार सुबह 10 बजे उनका निधन हो गया।
पटना से गांव तक उमड़ा जनसैलाब
मुंबई में औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पार्थिव शरीर को विमान से पटना लाया गया। पटना एयरपोर्ट पर CRPF के साथियों ने उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद विशेष वाहन से उन्हें उनके पैतृक गांव दहिया लाया गया। वीर जवान के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी और हर आंख नम थी।
15 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि
शोककुल माहौल के बीच पार्थिव शरीर को सिमरिया गंगा घाट ले जाया गया। वहां उनके 15 वर्षीय इकलौते पुत्र आशीष झा ने मुखाग्नि दी। मुरारी झा अपने पीछे पत्नी अनुबिता झा, बेटा आशीष और 13 वर्षीय बेटी आयशा को छोड़ गए हैं। बच्चों के सिर से पिता का साया उठने पर पूरे गांव में सहानुभूति और शोक की लहर है।
22 वर्षों का गौरवशाली सैन्य करियर
2002 में CRPF की 147 मोकामा बटालियन से करियर शुरू करने वाले मुरारी झा ने देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के डोडा और पहलगाम, असम के सिलचर और उत्तर प्रदेश के चंदौली जैसे दुर्गम क्षेत्रों में अपना कर्तव्य निभाया। ग्रामीणों ने बताया कि वे जितने सख्त सिपाही थे, उतने ही मिलनसार इंसान भी थे।
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