Crude Oil Price : शुक्रवार को तेल की कीमतें गिर गईं, क्योंकि प्रमुख यूरोपीय देशों और जापान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल होने की पेशकश की. अमेरिका ने तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए.

बढ़ती तेल कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्टीवन म्नुचिन ने कहा कि अमेरिका जल्द ही ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है, जो अभी टैंकरों में फंसा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से और कच्चा तेल जारी किए जाने की संभावना बनी हुई है.

0148 GMT तक, ब्रेंट वायदा $1.24 या 1.1 प्रतिशत गिरकर $107.41 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल $1.24 या 1.3 प्रतिशत गिरकर $94.90 पर आ गया. फिर भी इस सप्ताह के लिए बेंचमार्क ब्रेंट 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त बनाने की राह पर था. यह बढ़त खाड़ी देशों में तेल और गैस सुविधाओं पर ईरान के हमलों के बाद आई थी, जिसके कारण उत्पादन रोकना पड़ा था.

हालांकि, WTI पांच सप्ताह में अपनी पहली साप्ताहिक गिरावट दर्ज करने की स्थिति में था, जिसमें लगभग 4 प्रतिशत की कमी आई. WTI अभी ब्रेंट के मुकाबले 11 वर्षों में सबसे बड़ी छूट (discount) पर कारोबार कर रहा है. गुरुवार को जारी एक संयुक्त बयान में शुरुआती हिचकिचाहट के बाद ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने “जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करने के उचित प्रयासों में योगदान देने की अपनी तत्परता” व्यक्त की. यह एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिससे दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और LNG परिवहन किया जाता है.

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरानी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर और हमले करने से बचने का निर्देश दिया है. गुरुवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा, ‘ऐसा मत करो,’ और वे ऐसा नहीं करेंगे.” अमेरिका में आपूर्ति बढ़ाने के लिए, नॉर्थ डकोटा के कच्चे तेल का उत्पादन इस महीने और आने वाले महीनों में बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि देश के तीसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक राज्य में ऑपरेटर बंद पड़े कुओं को फिर से चालू कर रहे हैं और सर्दियों की पाबंदियों में ढील दी जा रही है.

हालांकि, नॉर्थ डकोटा के खनिज संसाधन विभाग ने कहा कि गतिविधियों की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि तेल की कीमतें कितने समय तक उंची बनी रहती हैं. साथ ही इस तथ्य पर भी कि प्रमुख तेल कंपनियों के बजट पहले ही तय किए जा चुके हैं.