दरभंगा। बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग ने दरभंगा में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर तेवर सख्त कर लिए हैं। आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिले को बाल श्रम से मुक्त करने के लिए धावा दल अब सप्ताह में कम से कम दो दिन सक्रिय रहेगा। विशेष रूप से ईंट-भट्ठों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा।

​दोषी नियोजकों पर जुर्माना और FIR

​वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 39 बाल श्रमिकों को रेस्क्यू किया गया है। प्रशासन ने न केवल सभी संबंधित नियोजकों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है, बल्कि प्रत्येक से 20,000 रुपये का जुर्माना भी वसूला है। यह राशि जिला बाल श्रम पुनर्वास कल्याण कोष में जमा कराई गई है। जुर्माना न भरने वालों के खिलाफ नीलाम पत्रवाद की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

​पुनर्वास और सरकारी योजनाओं का ला

​मुक्त कराए गए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उनका नामांकन नजदीकी स्कूलों में कराया गया है। उन्हें तत्काल 3,000 रुपये की सहायता और मुख्यमंत्री राहत कोष से 25,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दी गई है, जो 18 वर्ष की आयु पर मिलेगी। बच्चों को दोबारा श्रम में धकेले जाने से रोकने के लिए उनके परिवारों को राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड और लेबर कार्ड जैसी सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।

​प्रशासनिक मुस्तैदी: डीएम ने की विकास कार्यों की समीक्षा

​समाहरणालय में जिलाधिकारी कौशल कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक हुई। डीएम ने ई-कम्प्लायंस डैशबोर्ड, सीपीग्राम और मुख्यमंत्री जनता दरबार के लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का आदेश दिया। साथ ही, वृद्धापेंशनधारियों के जीवन प्रमाणीकरण और राजस्व शिकायतों को समय सीमा के भीतर सुलझाने के निर्देश दिए गए।

​जनसुनवाई: मौके पर शिकायतों का निपटारा

​निश्चय पार्ट-3: सबका सम्मान, जीवन आसान कार्यक्रम के तहत आयोजित जनसुनवाई में जिलाधिकारी ने 35 से अधिक मामलों को सुना। शिक्षा, भूमि विवाद, अतिक्रमण और ट्राई-साइकिल सहायता से जुड़ी कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया।