रवि रायकवार, दतिया। दतिया के मेडिकल कॉलेज में पदस्थ आउटसोर्स कर्मचारी का हाल बेहाल है। आउटसोर्स कर्मचारी अपनी सैलरी को लेकर लगातार कहीं प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, तो कहीं मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों के। लेकिन उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। आलम यह है कि लगातार चक्कर काटते काटते मिल रहे हैं तो सिर्फ आश्वासन, सैलरी नहीं। अब सवाल खड़ा होता है कि आखिर आउटसोर्स कर्मचारी अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करें।

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दतिया प्रशासन के पास  कुछ दिन पहले आउटसोर्स कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पहुंचे थे, जहां दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े  ने उन्हें तीन दिन का समय दिया था। लेकिन आज दिनांक (10. 01 26) तक उनकी सैलरी नहीं दी गई। आउटसोर्स कर्मचारी का कहना है कि बच्चों के फीस घर का खर्च आदि समस्या है, जिनको हम पूरा नहीं कर पा रहे, क्योंकि हमको सैलरी नहीं मिल रही।

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तकरीबन 3 महीने से आउटसोर्स कर्मचारी की सैलरी बंद है और कभी बजट का बहाना तो कभी कोई बहाना। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारी बना रहे हैं और आउटसोर्स कर्मचारी लगातार उनकी चक्कर काट रहे। अब देखना होगा कि इन आउटसोर्स कर्मचारी  पर किस तरह से जिला प्रशासन मेहरबान होता है और उनकी सैलरी निकालकर उनके लिए उनके परिवार का भरण पोषण करने में उनकी मदद करता है। 

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