अशोक श्रीवास्तव। डीडीयू जंक्शन पर यात्रियों के साथ खुलेआम लूट-खसोट का खेल चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिन अधिकारियों पर निगरानी की जिम्मेदारी है, वही पूरे तंत्र को संरक्षण देते नजर आ रहे हैं। स्टेशन के प्लेटफॉर्मों पर संचालित खान-पान स्टॉल लगातार यात्रियों से ओवरचार्जिंग कर रहे हैं और घटिया गुणवत्ता की खाद्य सामग्री बेचकर अवैध वसूली में जुटे हुए हैं।
इस पूरे खेल में रेलवे के कमर्शियल विभाग की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। डीडीयू जंक्शन के लगभग सभी प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों से मनमानी वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।

10 रुपये की चाय, न गुणवत्ता न मात्रा
ताज़ा मामला प्लेटफॉर्म संख्या 7 का है, जहां कृष्णा इंटरप्राइजेज नामक स्टॉल पर एक यात्री को 10 रुपये में चाय दी गई, लेकिन उसकी क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों ही बेहद खराब पाई गई। यात्री ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शिकायत दर्ज कराई है।
कैटरिंग इंस्पेक्टर और कमर्शियल सुपरवाइजर पर सवाल
नियमों के मुताबिक स्टेशन परिसर में संचालित स्टॉलों पर बिकने वाले सामानों की गुणवत्ता, वैधता और मात्रा की जिम्मेदारी कैटरिंग इंस्पेक्टर की होती है, जबकि समग्र निगरानी का दायित्व कमर्शियल सुपरवाइजर (जनरल) के पास होता है। ऐसे में सवाल उठना लाज़िमी है कि जब खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, तो आखिर यह सब किसके संरक्षण में हो रहा है?
इन दोनों अधिकारियों और स्टॉल संचालकों के बीच संबंधों को लेकर भी अब गंभीर संदेह पैदा हो गया है। आखिर यात्रियों के शोषण को इतनी खुली छूट कौन दे रहा है?
उच्चाधिकारियों ने लिया संज्ञान
हालांकि यात्री की शिकायत सामने आने के बाद रेलवे के उच्चाधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहती है या फिर यात्रियों को इस लूट-खसोट से वास्तव में राहत मिलती है।
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