अभिषेक सेमर, तख़तपुर. ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार की गारंटी देने वाला मनरेगा वित्तीय संकट से गुजर रहा है. जहां एक ओर पंचायतों में कराए गए कामों का करोड़ों रुपए का भुगतान लगभग साल भर से अटका हुआ है. वहीं अब इस योजना अंतर्गत काम कर रहे कर्मियों को 3 माह से वेतन भी नहीं मिला है. मनरेगा कर्मियों ने अपनी समस्या को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है.

बता दें कि, केंद्र सरकार की लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली महत्वकांक्षी योजना मनरेगा फंड की कमी से जूझ रहा है. मनरेगा के तहत पंचायतों के कराए गए कार्यों का करोड़ों का भुगतान लगभग एक वर्ष से रुका हुआ है. इसकी वजह से सरपंचों को बाजार से कर्ज में पैसे लेने पड़ रहे हैं और वे इस योजना के काम से हाथ खींचने लगे हैं.

 

इसे भी पढ़ेंः इस आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने मैदान में मचाया तहलका, 72 गेंद में ठोक डाले 237 रन

वहीं इस योजना के तहत जनपद और जिला पंचायत में काम करने वाले संविदा कर्मियों से ही ग्राम रोजगार सहायकों को 3 महीने से वेतन भी नहीं मिला है. इसके लिए नई रीट सिस्टम को कारण बताया जा रहा है. रीट सिस्टम में ऑनलाइन भुगतान किया जाना है, किंतु सिस्टम अपडेट नहीं होने के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है. अब संविदा कर्मियों ने मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है. अपनी समस्या को लेकर सभी मनरेगा कर्मियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी देते हुए कहा कि, यदि शीघ्र वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है तो दो दिवसीय प्रादेशिक हड़ताल की जाएगी.