दिल्ली विधानसभा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को लिखे पत्र के माध्यम से विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया है। विशेषाधिकार समिति ने आप प्रमुख को ‘फांसी घर’ से जुड़े मामले में शुक्रवार को तलब किया है। पत्र में समिति के अध्यक्ष ने केजरीवाल की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग पर आश्चर्य जताया है। केजरीवाल पिछले 10 साल से अधिक समय तक विधानसभा के सदस्य रहे हैं और विशेषाधिकार समिति की कई बैठकों में भाग ले चुके हैं। विधानसभा की कार्रवाई अब निर्धारित समय पर बंद कमरे में होगी, और समिति की बैठक सार्वजनिक रूप से प्रसारित नहीं होगी।

विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही गोपनीय

दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही गोपनीय है और इसके सीधे प्रसारण की अनुमति नियमों के अनुसार नहीं है। पत्र में बताया गया कि संसद या अन्य राज्यों में विशेषाधिकार समिति की बैठक का लाइव प्रसारण का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है। यह पत्र शुक्रवार को सार्वजनिक किया गया।

अज्ञानता पर आश्चर्य व्यक्त किया

पत्र में कहा गया कि समिति के अध्यक्ष ने केजरीवाल की अज्ञानता पर आश्चर्य व्यक्त किया, क्योंकि वे 10 वर्षों से अधिक समय तक विधानसभा के सदस्य रहे हैं और इस दौरान विशेषाधिकार समिति की कई बैठकें हुईं, लेकिन कभी भी किसी बैठक का टेलीकास्ट या लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की गई। मंगलवार को केजरीवाल ने समिति को पत्र लिखकर बताया कि वे ‘फांसी घर’ मामले में 6 मार्च को समिति के समक्ष पेश होंगे और कार्यवाही के लाइव प्रसारण की अनुमति मांग रहे हैं। सचिवालय ने इस मांग को परंपरा और नियमों के आधार पर खारिज कर दिया है।

क्या है AAP का दावा

इस मामले में आप सरकार का दावा है कि ब्रिटिश शासन के दौरान इस इमारत में गुप्त फांसी का तख्ता मौजूद था। वहीं, भाजपा का कहना है कि यह स्थान केवल एक टिफिन रूम था और कोई गुप्त फांसी से संबंधित इतिहास नहीं है। विशेषाधिकार समिति इस विवादित विषय पर सभी पक्षों के बयानों और साक्ष्यों की समीक्षा कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि यह ऐतिहासिक स्थल किस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया गया था।

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