जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल ही में एक कथित ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, इस मॉड्यूल में शामिल कुछ पेशेवरों जिनमें डॉक्टर भी बताए जा रहे हैं. ने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ‘अंसार अंतरिम’ नाम से एक संगठन बनाया था। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों की पहचान की गई, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि ये लोग कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने, सहयोग देने और संसाधन जुटाने में शामिल थे।

सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों और फंडिंग स्रोतों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें उच्च शिक्षित और पेशेवर लोगों की कथित संलिप्तता सामने आई है।

अधिकारियों के अनुसार, इस कथित ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़े आरोपियों ने वर्ष 2016 के आसपास कट्टरपंथी विचारधारा अपनाई थी। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किला के पास एक कार में हुए विस्फोट, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी, की जांच के दौरान इस नेटवर्क के सुराग मिले। अधिकारियों के मुताबिक, कार में विस्फोट करने वाला आरोपी डॉ. उमर नबी बताया गया है। बताया जा रहा है कि इसी जांच के दौरान अल फलाह यूनिवर्सिटी (हरियाणा) से जुड़े कई डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया था। जांच एजेंसियों ने पेशेवर पृष्ठभूमि वाले आरोपियों की कथित संलिप्तता के कारण इस नेटवर्क को ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ नाम दिया।

नेटवर्क का पता पिछले साल अक्टूबर में चला

अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का सुराग सबसे पहले पिछले साल 19 अक्टूबर को मिला था। श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम के बनपोरा क्षेत्र में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाए जाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई। मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने केस दर्ज कर आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच के आधार पर पुलिस ने आरिफ निसार डार, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी पत्थरबाजी से जुड़े मामले दर्ज थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं सुरागों के आधार पर आगे चलकर बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।

पिछले 3 साल में 8000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स फ्रीज

सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू और कश्मीर में कथित तौर पर “म्यूल अकाउंट्स” (फर्जी/फ्रीज बैंक खाते) के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है, जिनका इस्तेमाल टेरर फंडिंग के लिए होने का शक है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में ऐसे करीब 8,000 संदिग्ध खातों को फ्रीज किया गया है। जांच में सामने आया है कि ये खाते अक्सर अनजान या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर होते थे, जिन्हें आसान कमीशन और कम जोखिम का लालच देकर तैयार किया जाता था। इसके बाद उनसे बैंकिंग क्रेडेंशियल्स (जैसे पासवर्ड, ओटीपी, एटीएम/नेट बैंकिंग एक्सेस) साझा कराने के लिए कहा जाता था।

आरोप है कि इन खातों को कुछ समय के लिए “पार्किंग अकाउंट” के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था, ताकि संदिग्ध लेनदेन को असली स्रोत से छिपाया जा सके और पैसे को अलग-अलग खातों में घुमाकर ट्रैक करना मुश्किल बनाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग, हवाला और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। मामले में संबंधित एजेंसियां बैंकिंग चैनलों और संदिग्ध ट्रांजैक्शनों की गहन जांच कर रही हैं।

UN का दावा- जैश ने ली दिल्ली ब्लास्ट की जिम्मेदारी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली के लाल किला के पास हुए विस्फोट की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने ली है। रिपोर्ट में जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि उस हमले में शामिल तीनों आतंकियों को सुरक्षा बलों ने बाद में मार गिराया। बताया गया है कि यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध समिति को सौंपी गई है, जो आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों तथा उनसे जुड़े व्यक्तियों और नेटवर्क पर निगरानी रखती है।

जैश ने बनाया महिला आतंकियों का संगठन

रिपोर्ट के अनुसार मसूद अजहर, जो जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का प्रमुख माना जाता है, ने अक्टूबर 2025 में कथित तौर पर महिला आतंकियों की एक अलग विंग बनाई थी, जिसका नाम “जमात-उल-मुमिनात” बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस विंग का उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को समर्थन देना था। हालांकि, यह संगठन अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में शामिल नहीं है। रिपोर्ट में सदस्य देशों के अलग-अलग आकलन का भी उल्लेख किया गया है। कुछ देशों का मानना है कि JeM अब भी आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है, जबकि अन्य देशों ने इसे अपेक्षाकृत निष्क्रिय बताया है।

NIA को भी जैश से जुड़े होने के लिंक मिले

दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच के दौरान एजेंसी को इस साजिश के तार जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवात-उल-हिंद से जुड़े होने के संकेत मिले। अधिकारियों के अनुसार, अब तक इस मामले में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 5 डॉक्टर भी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये आरोपी कथित तौर पर नेटवर्क को लॉजिस्टिक सपोर्ट, संसाधन और अन्य प्रकार की मदद उपलब्ध कराते थे।

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