नई दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट का मामला सामने आया है जहां रिटायर्ड बुजुर्गों से करीब 30 करोड़ रुपए ठग लिए गए। जांच एजेंसी CBI की एफआईआर से पता चला है कि ठगों ने गिरफ़्तारी का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट कर पीड़ितों को महीनों तक मानसिक दबाव बनाया और पैसे निकलवाए। दोनों मामलों में पीड़ितों को फोन कॉल के जरिए डराया गया और उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया।

पहला मामला: रिटायर्ड प्रोफेसर से 11 करोड़ से ज्यादा की ठगी

पहला मामला 73 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर का है। 10 जून 2025 की सुबह करीब 9.15 बजे उन्हें एक महिला का फोन आया जिसने खुद को दूरसंचार विभाग की कर्मचारी बताया। उसने कहा कि उनका मोबाइल नंबर दो घंटे में बंद हो जाएगा क्योंकि उनके खिलाफ शिकायत दर्ज है।

फर्जी CBI अधिकारी बनकर डराया

फोन तुरंत एक व्यक्ति के पास ट्रांसफर कर दिया गया जिसने खुद को सीबीआई का इंस्पेक्टर विजय खन्ना बताया। उसने दावा किया कि महिला की पहचान एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है, जिसमें जेट एयरवेज के मालिक का नाम बताया गया। ठग व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में दिखाई देते थे और पीछे पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप रखते थे।

महिला को बताया गया कि वह डिजिटल अरेस्ट में हैं और उन्हें घर से बाहर जाने या किसी से बात करने की अनुमति नहीं है। उन्हें एक कोड USA7739 दिया गया और कहा गया कि अगर उन्होंने किसी वकील या पुलिस को बताया तो तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डर के कारण महिला कमरे में बंद होकर घंटों वीडियो कॉल पर रहती थीं और रात में भी कॉल चालू रखती थी।

पैसे ट्रांसफर करवाने की साजिश

ठगों ने फर्जी कोर्ट आदेश और दस्तावेज भेजकर भरोसा दिलाया कि पैसे सरकारी खातों में जांच के लिए भेजने होंगे। महिला ने अपने गहने बेचे, म्यूचुअल फंड तोड़े और करोड़ों रुपए ट्रांसफर कर दिए। बाद में उनके पति को भी डिजिटल अरेस्ट में डाल दिया गया और उन्होंने भी अपनी एफडी और पीपीएफ तोड़ दिए। जून से अगस्त के बीच दंपती ने कुल 11 करोड़ 42 लाख 75 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए।

दूसरा मामला: रिटायर्ड डॉक्टर से 19 करोड़ की ठगी

दूसरा मामला 74 वर्षीय रिटायर्ड गायनेकोलॉजिस्ट का है जो कई सालों से गांधीनगर में रह रही थीं। 15 मार्च 2025 को दोपहर 3.30 बजे उन्हें ज्योति विश्वनाथ नाम की महिला का फोन आया जिसने खुद को दिल्ली के दूरसंचार विभाग से बताया। उसने कहा कि उनके मोबाइल नंबर से आपत्तिजनक संदेश भेजे जा रहे हैं और नंबर बंद किए जा रहे हैं।

जब महिला ने स्थानीय पुलिस स्टेशन जाने की बात कही तो कॉल मुंबई पुलिस से जोड़ दिया गया। फोन पर एक व्यक्ति ने खुद को पुलिस सब इंस्पेक्टर मोहन सिंह बताया और कहा कि वह मनी लॉन्ड्रिंग मामले की मुख्य आरोपी हैं। इसके बाद उनसे आधार नंबर मांगा गया और कहा गया कि केस गोपनीय है इसलिए उन्हें 24 घंटे वीडियो निगरानी में रहना होगा.

परिवार से भी छुपाकर रखी बात

डर के कारण महिला लगातार व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर रहती थीं। ठग ने अपना नंबर शीतल के नाम से सेव करने को कहा ताकि परिवार को शक न हो। फिर कई और फर्जी अधिकारी सामने आए, जिनमें पब्लिक प्रॉसिक्यूटर दीपक सैनी, वेंकटेश्वर और नोटरी अधिकारी पवन कुमार शामिल थे।

ठगों ने सरकारी जांच के नाम पर पैसे सरकारी निगरानी खातों में ट्रांसफर करने को कहा। महिला ने 31 एफडी तोड़ी, 800 ग्राम और 894 ग्राम सोने की बार बेची और गहनों पर लोन भी लिया। इतना ही नहीं, दबाव में आकर उन्होंने अपनी बेटियों से पैसे लिए और परिवार का घर भी बेच दिया।

कुल 19 करोड़ से ज्यादा की ठगी

मार्च से जून के बीच महिला ने 35 बैंक खातों में कुल 19 करोड़ 24 लाख 41 हजार 541 रुपए ट्रांसफर कर दिए। 25 जून 2025 को आखिरी ट्रांसफर के बाद ठगों ने कहा कि पैसे 10 दिन में वापस मिल जाएंगे। लेकिन जब उन्होंने दो हफ्ते बाद संपर्क करने की कोशिश की तो सभी फोन बंद थे और तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ।

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