दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हाल ही में एक ऐसा संवेदनशील फैसला सुनाया है, जिसने न्याय में दया और पारिवारिक रिश्तों की पवित्रता को प्रमुखता दी है। कोर्ट ने एक महिला के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज कर दिया, जिस पर अपने गार्जियन की हत्या की कोशिश का आरोप था। जस्टिस प्रतीक जालान की बेंच ने कहा कि “कभी-कभी न्याय में दया का होना जरूरी है, और यह मामला इसके लिए सही उदाहरण है।” अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पारिवारिक रिश्ते संवेदनशील और पवित्र होते हैं, और उनका ध्यान रखना न्याय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मामला में कब आया टर्निंग पॉइंट
अदालत ने महिला के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज कर दिया, जिस पर अपने गार्जियन की हत्या करने का आरोप था। जस्टिस प्रतीक जालान की बेंच ने कहा कि “अदालत के पास न्याय के उद्देश्य को पूरा करने के लिए ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने की शक्ति है।” यह टर्निंग पॉइंट तब आया जब हमले की शिकार शिकायतकर्ता ने माफी की स्पष्ट इच्छा जताई।
शिकायतकर्ता, जो एक रिटायर्ड टीचर हैं, ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपनी भावनाओं को दबाते हुए याचिकाकर्ता को माफ कर दिया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के साथ उनका रिश्ता सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से बायोलॉजिकल माता-पिता और बच्चे के रिश्ते जैसा ही महत्वपूर्ण था। कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया कि पारिवारिक रिश्तों की पवित्रता और भावनात्मक समझ कानून के कठोर दायरे के भीतर भी न्याय के निर्णय में अहम भूमिका निभाती है।
‘क्वालिटी ऑफ मर्सी’ स्पीच
कोर्ट ने अपने फैसले में शेक्सपियर के ‘द मर्चेंट ऑफ वेनिस’ के प्रसिद्ध भाषण “The quality of mercy is not strained” का हवाला दिया। जस्टिस जालान ने कहा कि इस पारिवारिक झगड़े में माफी की भावना को सजा में तब्दील करने में सामाजिक हित को प्राथमिकता देना चाहिए, और ट्रायल जारी रखना न्याय का मजाक होगा। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को बिना सामाजिक दायित्व की भरपाई के जाने की अनुमति नहीं दी। याचिकाकर्ता एंटोनेट को अगले चार महीनों में सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में 30 कम्युनिटी सर्विस सेशन पूरे करने का निर्देश दिया गया है।
शिकायतकर्ता, जो एक रिटायर्ड टीचर हैं, ने अदालत में बताया कि उन्होंने अपनी भावनाओं को दबाते हुए याचिकाकर्ता को माफ कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के साथ उनका रिश्ता सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से बायोलॉजिकल माता-पिता और बच्चे के रिश्ते जैसा ही महत्वपूर्ण था।
क्या था पूरा मामला
यह मामला एंटोनेट पामेला फर्नाडीज और उनके लीगल गार्जियन से जुड़ा था। एंटोनेट अनाथ बच्ची थीं और उन्हें उनके गार्जियन और उनके गुजरे हुए पति ने सिर्फ तीन महीने की उम्र में अपने पास रखा। दशकों तक उन्हें परिवार का सदस्य माना गया, पढ़ाई पूरी करवाई गई और वे बेटी की तरह पाली गईं। लेकिन फरवरी 2019 में यह रिश्ता टूट गया, जब एंटोनेट ने कथित तौर पर प्रेयर के दौरान अपने गार्जियन पर लकड़ी के क्रॉस और चाकू से हमला कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में शेक्सपियर के ‘द मर्चेंट ऑफ वेनिस’ के भाषण “The quality of mercy is not strained” का हवाला दिया और कहा कि इस पारिवारिक झगड़े में माफी की भावना को सजा में तब्दील करने में सामाजिक हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को बिना सामाजिक दायित्व की भरपाई के जाने की अनुमति नहीं दी। एंटोनेट को अगले चार महीनों में सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में 30 कम्युनिटी सर्विस सेशन पूरे करने का निर्देश दिया गया है। शिकायतकर्ता, जो रिटायर्ड टीचर हैं, ने अदालत में बताया कि उन्होंने अपनी भावनाओं को दबाते हुए एंटोनेट को माफ कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के साथ उनका रिश्ता सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से बायोलॉजिकल माता-पिता और बच्चे के रिश्ते जैसा ही महत्वपूर्ण था।
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