नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि नाबालिग बच्चे का पासपोर्ट केवल पिता के नाम पर निर्भर नहीं होगा। अदालत ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में बच्चा बिना पिता के नाम के भी पासपोर्ट बनवा सकता है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह व्यवस्था माता या पिता दोनों पर समान रूप से लागू हो सकती है। यदि यह स्पष्ट हो कि बच्चा पूरी तरह से किसी एक अभिभावक मां या पिता के संरक्षण में है, तो पासपोर्ट जारी करने में दूसरे अभिभावक के नाम को अनिवार्य नहीं माना जाएगा।
जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि विशेष परिस्थितियों में बच्चे का पासपोर्ट पिता के नाम के बिना भी जारी किया जा सकता है। यह मामला एक पांच साल की बच्ची से जुड़ा था, जिसकी ओर से उसकी मां ने याचिका दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि बच्ची का पासपोर्ट पिता के नाम के बिना बनाया जाए, क्योंकि बच्ची पूरी तरह अपनी मां के संरक्षण में रह रही है।
सुनवाई के बाद अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया कि वह बच्ची का पासपोर्ट पिता के नाम के उल्लेख के बिना जारी करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए और नियमों की कठोर व्याख्या से बचना चाहिए। बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि बच्ची के माता-पिता के बीच विवाद था और वर्ष 2021 में, जब बच्ची मात्र चार महीने की थी, तब दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लेने का फैसला किया था। इसके बाद से बच्ची अपनी मां के साथ रह रही है।
अदालत ने यह भी गौर किया कि बच्ची का सरनेम स्कूल में मां और नाना-नानी के नाम पर दर्ज है। साथ ही, तलाक समझौते में पिता ने बच्ची पर कोई अधिकार नहीं जताया और न ही भविष्य में उससे मिलने की इच्छा व्यक्त की। इन तथ्यों के आधार पर बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में जबरन बच्चे के साथ पिता या मां का नाम जोड़ना आवश्यक नहीं है। अदालत ने माना कि बच्चे के सर्वोत्तम हित (best interest) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया कि बच्ची का पासपोर्ट पिता के नाम के बिना जारी किया जाए।
पिता से हक मांगा तो पासपोर्ट रद्द होगा
च ने स्पष्ट किया कि यदि बच्ची बालिग होने के बाद अपने पिता से किसी भी प्रकार का कानूनी अधिकार मांगती है, तो क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को यह अधिकार होगा कि वह मौजूदा पासपोर्ट को रद्द कर नया पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दे। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले में नए पासपोर्ट में पिता के नाम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। बेंच ने अपने आदेश में यह भी दोहराया कि मौजूदा स्थिति में बच्ची पूरी तरह सिंगल पैरेंट (मां) के संरक्षण में है। इसलिए फिलहाल उसके पासपोर्ट में केवल मां का नाम ही दर्ज किया जाए।
अदालत ने पाया कि इस मामले में पिता का रवैया काफी रुखा और उदासीन रहा। तलाक के दौरान पिता ने समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए इस बात पर सहमति दी थी कि नाबालिग बेटी अपनी मां के पास ही रहेगी। इसके बावजूद, बच्ची के जीवन में उसकी सक्रिय भागीदारी नहीं दिखी।
इन दस्तावेजों की पड़ती है जरूरत
भारत में नया पासपोर्ट बनवाने के लिए अब कुछ जरूरी दस्तावेजों और नियमों का पालन करना अनिवार्य है। सरकार ने प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं।
जरूरी पात्रता और दस्तावेज
पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को सबसे पहले भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। इसके अलावा निम्न दस्तावेज जरूरी हैं- उम्र का प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड या किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड की मार्कशीट , पते का प्रमाण: बिजली बिल, बैंक पासबुक या अन्य वैध एड्रेस प्रूफ
जन्मतिथि के लिए नया नियम
1 अक्टूबर 2023 से लागू नए नियमों के अनुसार, जन्मतिथि प्रमाण के लिए अब जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र (School Leaving Certificate) देना जरूरी कर दिया गया है।
पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य
पासपोर्ट जारी होने से पहले पुलिस सत्यापन (Police Verification) किया जाता है। इसमें आवेदक का रिकॉर्ड साफ होना जरूरी है। किसी भी आपराधिक मामले की स्थिति में पासपोर्ट जारी होने में दिक्कत आ सकती है।
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