राजधानी दिल्ली समेत NCR की हवा खराब हो गई है. फिर एक बार दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान के तहत पाबंदिया लागू कर दी गई है. वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने आदेश जारी कर दिया है. आमतौर पर ग्रैप-1 तब लागू किया जाता है, जब शहर का AQI 200 के पार पहुंच जाता है।

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अप्रैल महीने में देश की राजधानी दिल्ली समेत एनसीआर की हवा खराब क्षेणी में पहुंच गई है. वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने आदेश जारी कर दिया है. तत्काल प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-1 की के तहत सभी पाबंदियों को लागू कर दिया गया है.

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GRAP-1 लागू होने के बाद अब होटल, रेस्टोरेंट में कोयले और लकड़ी का इस्तेमाल नहीं होगा. इसके अलावा कंस्ट्रक्शन और डेमोलेशन वर्क के दौरान धूल रोकने के विशेष उपाय करने होंगे. साथ ही बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों पर भी रोक रहेगी.

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ग्रैप-1 में इन बातों का रखना होता है ध्यान
ग्रैप-1 के तहत निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) गतिविधियों में धूल शमन उपायों और सीएंडडी कचरे के ठोस पर्यावरण प्रबंधन पर निर्देशों का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाता है. साथ ही 500 वर्ग मीटर के बराबर या उससे अधिक के भूखंड आकार वाली ऐसी परियोजनाओं के संबंध में सीएंडडी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी, जो संबंधित के वेब पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं.

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आपको बता दें कि ग्रैप को दिल्ली-एनसीआर में प्रतिकूल वायु गुणवत्ता के चार अलग-अलग चरण के हिसाब से बांटा गया गया है. ग्रैप का चरण-1 उस वक्त लागू होता है, दिल्ली में जब AQI का स्तर 201-300 के बीच होता है. साथ ही ग्रैप का दूसरा चरण उस परिस्थिति में प्रभावी होता है, जब राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 301-400 के बीच ‘बहुत खराब’ मापा जाता है. इसके अलावा तीसरे चरण में ‘गंभीर’ वायु गुणवत्ता के बीच लागू किया जाता है और जब एक्यूआई 401-450 के बीच होता है. ग्रैप कार्य योजना का अंतिम और आखिरी चरण-4 ‘गंभीर +’ वायु गुणवत्ता की परिस्थिति में लागू किया जाता है

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