दिल्ली पुलिस(Delhi Police) ने एक बड़े साइबर फ्रॉड(cyber fraud) मामले में अहम सफलता हासिल की है। पुलिस ने बुजुर्ग डॉक्टर दंपती से ठगे गए 14 करोड़ 85 लाख रुपये में से करीब 1.90 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए हैं। पुलिस के मुताबिक यह ठगी डिजिटल अरेस्ट(Digital Arrest) के जाल में फंसाकर की गई थी। स्कैम में पीड़ितों को फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से डराया जाता है और उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने के लिए मजबूर किया जाता है। दिल्ली पुलिस की टीम ने फंड फ्रीज कर आर्थिक नुकसान कम करने के साथ-साथ आगे की जांच भी तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार मामले में और भी गिरफ्तारी की संभावना है और जांच जारी है।

डॉक्टर दंपती को डिजिटल तरीके से घर में किया गया कैद

दिल्ली पुलिस ने साइबर फ्रॉड मामले में अहम सफलता हासिल की है। पुलिस ने बुजुर्ग डॉक्टर दंपती से ठगे गए 14 करोड़ 85 लाख रुपये में से करीब 1.90 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए हैं। इस मामले में साउथ दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले 81 साल के डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी 77 साल की पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा को निशाना बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, 24 दिसंबर से 9 जनवरी तक दोनों को लगातार फोन कॉल और वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया।

स्कैम में पीड़ितों को डराकर घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने के लिए मजबूर किया गया। दिल्ली पुलिस ने फंड फ्रीज कर आर्थिक नुकसान कम करने के साथ-साथ आगे की जांच तेज कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगों ने खुद को टेलीकॉम कंपनी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी बताया और दावा किया कि डॉक्टर दंपती के नाम पर फर्जी गतिविधियां पकड़ी गई हैं। इसके बाद गिरफ्तारी और केस की धमकी देकर उन्हें बार-बार पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

700 से बैंक अकाउंट में भेजी गई रकम

पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को छिपाने के लिए जालसाजों ने 700 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया। जांच के अनुसार, सबसे पहले ठगी की रकम को गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तराखंड में स्थित सात प्राइमरी अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद इन खातों से रकम को तेजी से 200 से 300 अन्य खातों में घुमाया गया, ताकि पैसों के असली ट्रेल को छिपाया जा सके और पुलिस को जांच में भ्रमित किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका संगठित साइबर अपराध गिरोहों द्वारा आमतौर पर अपनाया जाता है।

गुवाहाटी से लेकर गुजरात तक किए गए पैसे ट्रांसफर

दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि बुजुर्ग डॉक्टर दंपती से ठगे गए 14.85 करोड़ रुपये की रकम को विभिन्न राज्यों और खातों में ट्रांसफर किया गया। जांच के अनुसार ट्रांसफर की टाइमलाइन इस प्रकार है 26 दिसंबर: असम के गुवाहाटी में लगभग 1.99 करोड़ रुपये भेजे गए। 29 और 30 दिसंबर: गुजरात के वडोदरा में दो-दो करोड़ रुपये भेजे गए। 2 जनवरी: 2 करोड़ रुपये दिल्ली के मयूर विहार में स्थित खाते में पहुंचे। 5 जनवरी: 2.05 करोड़ रुपये मुंबई के नेपियन सी रोड स्थित खाते में ट्रांसफर किए गए।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, बुजुर्ग डॉक्टर दंपती से ठगे गए 14.85 करोड़ रुपये के मामले में इस्तेमाल किया गया मल्टी-लेयर म्यूल अकाउंट नेटवर्क बेहद जटिल है। इसी वजह से पैसों का पूरा ट्रेल निकालने में समय लग रहा है। पुलिस बैंक और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट की मदद से जुड़े खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच तेजी से जारी है। पुलिस का मानना है कि जल्द ही इस जटिल नेटवर्क में शामिल और लोगों की पहचान हो सकती है और अगले चरण की कार्रवाई की जाएगी।

समझें क्या है डिजिटल अरेस्ट, कैसे बचें?

सभी नागरिकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई भी चीज कानून में मौजूद नहीं है। यह पूरी तरह से ठगी का तरीका है, जिससे लोगों को डराकर उनसे पैसे ऐंठे जाते हैं। डिजिटल अरेस्ट उस स्थिति को कहा जाता है, जब ठग खुद को ईडी, सीबीआई, पुलिस, कोर्ट या बैंक का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल पर संपर्क करता है। ठग पीड़ित को यह कहकर डराने की कोशिश करता है कि उसके नाम पर कोई केस दर्ज है या उसके आधार कार्ड और बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी गतिविधि में किया जा रहा है। इसके बाद ठग दावा करता है कि पीड़ित को ‘डिजिटल रूप से गिरफ्तार’ किया जा रहा है। इस बहाने वह व्यक्ति को घंटों तक वीडियो कॉल पर बैठाए रखता है, उसे घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने के लिए मजबूर करता है, ताकि पीड़ित मदद न मांग सके।

क्या करें?

किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई आदेश मान्य नहीं होता। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। ऐसे किसी कॉल पर डरें नहीं, कॉल काटें और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।

तुरंत काट दें ऐसे ठगों का कॉल

इतना ही नहीं, ऐसे ठग आपसे बार-बार पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करेंगे और फर्जी धमकियां देंगे। कई बार पीड़ित डर के मारे पैसे भी दे देता है। लेकिन ध्यान रहे कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। पुलिस या सीबीआई कभी भी आपको वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तार नहीं करेगी, और कोई भी आधिकारिक जांच एजेंसी पैसे मांगकर जांच नहीं करती। यदि आपको ऐसे कॉल आते हैं बिना डरे तुरंत कॉल काट दें। ठग को कोई पैसा ट्रांसफर न करें। फौरन पुलिस को इसकी सूचना दें या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ। सावधानी और जागरूकता ही ऐसे साइबर फ्रॉड से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

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