देश की राजधानी दिल्ली को अपनी ‘नई पहचान’ यानी आधिकारिक LOGO के लिए अभी और इंतज़ार करना होगा। दिल्ली सरकार ने फिलहाल आधिकारिक लोगो अपनाने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। खास बात यह है कि इस लोगो के लिए देशभर से करीब 1,800 से अधिक डिजाइन मंगाए गए थे, लेकिन चयन समिति को इनमें से एक भी डिजाइन पसंद नहीं आया।

क्यों रिजेक्ट हुए 1800 डिजाइन?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली एक विशेष समिति ने आधिकारिक लोगो के लिए आए सभी डिज़ाइनों का मूल्यांकन किया था। MyGov.in पोर्टल के माध्यम से प्राप्त करीब 1,800 आवेदनों में दिल्ली के खान-पान, ऐतिहासिक स्मारकों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न प्रतीक शामिल थे। सरकार की मंशा ऐसा लोगो अपनाने की थी, जो दिल्ली की मिली-जुली संस्कृति, लोकतांत्रिक भावना और एक ग्लोबल मेट्रोपोलिस के रूप में हो रहे बदलाव को प्रभावी ढंग से दर्शा सके, लेकिन समिति को कोई भी डिज़ाइन इन मानकों पर खरा नहीं लगा।

सूत्रों के मुताबिक, समिति ने डिजाइन विशेषज्ञों और मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया, लेकिन किसी भी डिज़ाइन को सरकार के पैमाने पर उपयुक्त नहीं पाया गया। दिल्ली सरकार को ऐसा लोगो चाहिए था जो ‘परंपरा और आधुनिकता’ का संगम दर्शा सके और राजधानी की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और शहरी पहचान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करे। हालांकि, किसी भी शॉर्टलिस्ट किए गए डिजाइन पर समिति और अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन सकी, जिसके कारण आधिकारिक लोगो को अपनाने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।

1 नवंबर को होना था लॉन्च

योजना के मुताबिक, नया लोगो और टैगलाइन पिछले साल 1 नवंबर, दिल्ली के स्थापना दिवस के मौके पर लॉन्च किए जाने थे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे दिल्ली के लिए एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ बताया था और कहा था कि दशकों से भारत की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली की अपनी कोई औपचारिक पहचान नहीं थी। इस नए लोगो का उद्देश्य राजधानी की संस्कृति, विरासत और आधुनिकता को दर्शाना था। इसे सरकारी स्टेशनरी, सरकारी इमारतों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थायी प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाना था, ताकि दिल्ली की अलग और सुसंगठित पहचान बन सके।

फिलहाल ‘अशोक स्तंभ’ से ही चलेगा काम

चूंकि किसी भी डिजाइन को फाइनल नहीं किया जा सका है, दिल्ली सरकार ने फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाई है। एक अधिकारी ने बताया कि अभी कोई जल्दबाजी नहीं है और सरकारी कामकाज में पहले की तरह अशोक स्तंभ का इस्तेमाल जारी रहेगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि संभावना है कि सरकार अब भविष्य में शायद कोई नया लोगो फाइनल ही न करे, और राजधानी की पहचान को वर्तमान प्रतीक और प्रतीकात्मक संस्थाओं के माध्यम से ही बनाए रखा जाएगा।

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