दिल्ली सरकार द्वारा वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शुरू किया गया इनोवेशन चैलेंज अब अगले चरण में पहुंच गया है। इस पहल के तहत चयनित 22 डिवाइसेज को अब शहर के विभिन्न हिस्सों में ऑन-ग्राउंड ट्रायल के लिए तैयार किया जा रहा है। आने वाले हफ्तों में इन डिवाइस को चिन्हित प्रदूषण हॉटस्पॉट पर स्थापित किया जाएगा। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से यह आकलन किया जाएगा कि ये तकनीकें पार्टिकुलेट मैटर (PM) और अन्य महत्वपूर्ण वायु गुणवत्ता पैरामीटर को कम करने में कितनी प्रभावी हैं।

दिल्ली सरकार के इनोवेशन चैलेंज के अगले चरण को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने की, जिसमें पिछले कई हफ्तों में हुई तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया। बैठक में टेस्टिंग प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने, चयनित डिवाइसेज की उपलब्धता और तकनीकी तैयारी, तथा शहर में इन्हें लगाने के लिए इनोवेटर्स के साथ समन्वय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी पहलुओं को तय कर लिया गया है ताकि ट्रायल प्रक्रिया वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से पूरी की जा सके।

मंत्री सिरसा ने अधिकारियों को दिए निर्देश

समीक्षा बैठक के दौरान पर्यावरण मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन डिवाइसेज का ट्रायल वैज्ञानिक रूप से मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से किया जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षण प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे जल्दी और सटीक निर्णय लिया जा सके कि राष्ट्रीय राजधानी के लिए वायु प्रदूषण से निपटने का सबसे प्रभावी तकनीकी समाधान कौन-सा है। मंत्री सिरसा ने यह भी जोर दिया कि ट्रायल के दौरान सभी पैरामीटर जैसे पार्टिकुलेट मैटर (PM) में कमी, तकनीक की प्रभावशीलता और व्यवहारिकता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए, ताकि भविष्य में सफल तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू कर दिल्ली में प्रदूषण कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।

नोवेशन चैलेंज में कुल 284 एंट्री

दिल्ली सरकार के इनोवेशन चैलेंज में देश भर से कुल 284 एंट्री प्राप्त हुई थीं। विशेषज्ञों की तकनीकी समिति द्वारा की गई विस्तृत स्क्रीनिंग के बाद इनमें से 22 डिवाइस को ट्रायल-रन चरण के लिए चुना गया है। इनमें से 13 समाधान ऐसे हैं जो वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने पर केंद्रित हैं। इन तकनीकों में व्हीकल-माउंटेड एयर प्यूरीफायर, रेट्रोफिट एमिशन-कंट्रोल सिस्टम, बायो-अल्कलाइन एग्जॉस्ट स्क्रबर और बसों, ट्रकों तथा जेनसेट्स के लिए विभिन्न रेट्रोफिट तकनीकें शामिल हैं।

9 डिवाइस एम्बिएंट एयर के लिए डिजाइन किए गए

दिल्ली सरकार के इनोवेशन चैलेंज में चुने गए 22 समाधानों में से बाकी 9 डिवाइस एम्बिएंट एयर (आसपास की हवा) को साफ करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इन तकनीकों में मॉड्यूलर और स्टैटिक एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम, डस्ट सप्रेशन यूनिट, स्मॉग-कंट्रोल टेक्नोलॉजी समेत कई अन्य समाधान शामिल हैं। इन डिवाइसेज को खास तौर पर खुले स्थानों, रोड कॉरिडोर, औद्योगिक क्षेत्रों और कंस्ट्रक्शन जोन जैसे इलाकों में उपयोग के लिए विकसित किया गया है, जहां धूल और प्रदूषण का स्तर आमतौर पर ज्यादा होता है।

मंत्री ने समिति और इनोवेटर्स की सराहना की

दिल्ली सरकार के इनोवेशन चैलेंज के अगले चरण को लेकर पर्यावरण मंत्री Manjinder Singh Sirsa ने हाल के हफ्तों में समिति और इनोवेटर्स द्वारा किए गए लगातार प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने टेस्टिंग प्रोटोकॉल तैयार करने और उसे बेहतर बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की है। साथ ही इनोवेटर्स के साथ नजदीकी संवाद बनाए रखते हुए हर डिवाइस की तैयारी का आकलन किया गया है। समिति ने स्टैटिक और व्हीकल-आधारित सिस्टम की इंस्टॉलेशन के लिए जरूरी आवश्यकताओं की पहचान भी की है। इसके अलावा स्टैटिक डिवाइस लगाने के लिए संभावित स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है और मॉनिटरिंग, डेटा कलेक्शन तथा परफॉर्मेंस रिव्यू के साथ एक स्ट्रक्चर्ड ट्रायल-रन के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस भी तैयार की जा रही हैं।

मंत्री सिरसा ने कहा, “यह इनोवेशन चैलेंज जमीन पर प्रदूषण कम करने वाले वास्तविक और मापने योग्य समाधान खोजने का एक मिशन है। जब ये 22 डिवाइस दिल्ली के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में ट्रायल के लिए लगाए जाएंगे, तब हमारा एक ही मानक होगा सबूत। यानी कौन-सी तकनीक प्रदूषण में साफ और लगातार कमी दिखाती है और जिसे तेजी से बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।”

प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कई मोर्चों पर काम

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है। इसमें प्रदूषण की मॉनिटरिंग को मजबूत करना, मौजूदा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना और साथ ही इनोवेशन चैलेंज के माध्यम से नई तकनीकों को प्रोत्साहन देना शामिल है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि Delhi एक ऐसा मॉडल बने, जहां सख्त एनफोर्समेंट और इनोवेटिव सॉल्यूशन साथ-साथ आगे बढ़ें। जैसे ही इन ट्रायल के जरिए सबसे बेहतर तकनीक की पहचान होगी, हम उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे।”

परफॉर्मेंस डेटा पर नजर

ट्रायल चरण शुरू होने के साथ ही दिल्ली सरकार का पर्यावरण विभाग और Delhi Pollution Control Committee सभी डिवाइस से मिलने वाले परफॉर्मेंस डेटा पर करीबी नजर रखेंगे। इस दौरान समय-समय पर मंत्री स्तर पर समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाएंगी, ताकि ट्रायल की प्रगति और परिणामों का मूल्यांकन किया जा सके। इन ट्रायल से प्राप्त नतीजे अंतिम विजेता सॉल्यूशन के चयन में अहम भूमिका निभाएंगे। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि सफल तकनीकों को Delhi की व्यापक क्लीन-एयर रणनीति में किस तरह शामिल किया जाए और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने का रोडमैप क्या होगा

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