दिल्ली के सूख चुके जलाशयों को दोबारा जीवन देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। वसंत कुंज स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से शुद्धिकृत अपशिष्ट जल को रंगपूरी गांव के सूखे तालाब तक पहुंचाने के लिए एक विशेष पाइपलाइन बिछाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। यह पहल दिल्ली के हाल ही में जारी ड्रेनेज मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य शहर के पारंपरिक जलाशयों को पुनर्जीवित करना और भूजल स्तर को बढ़ाना है। इस परियोजना से तालाबों में दुबारा पानी भरने में मदद मिलेगी, बारिश के मौसम में जल संरक्षण क्षमता बढ़ेगी, और आसपास के इलाकों में ग्राउंडवॉटर रिचार्ज भी बेहतर होगा।
क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत वसंत कुंज के ई-2 ब्लॉक स्थित एसटीपी से रंगपूरी गांव के खसरा नंबर 660 में मौजूद सूखे तालाब तक डक्टाइल आयरन (DI) पाइपलाइन बिछाई जाएगी। वर्तमान में यह तालाब साल के अधिकांश समय सूखा रहता है और किसी भी तरह का प्राकृतिक जलसंचयन नहीं हो पाता। इस परियोजना के लिए एक ठेकेदार नियुक्त किया जाएगा, जो साइट का निरीक्षण करने के बाद आवश्यक उपकरण, सामग्री, मजदूर और मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। पाइपलाइन बिछाने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन, समयबद्ध कार्य और तकनीकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाया जाने वाला शुद्धिकृत जल पूरी तरह निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होगा। इससे न केवल भूजल रिचार्ज में मदद मिलेगी, बल्कि तालाब का प्राकृतिक इकोसिस्टम भी धीरे-धीरे पुनर्जीवित होगा।
क्या है ये नया तरीका?
वर्तमान व्यवस्था में एसटीपी से निकलने वाला शुद्धिकृत जल नालियों में छोड़ दिया जाता है, जिससे प्राकृतिक जलाशयों को कोई लाभ नहीं मिल पाता। लेकिन नई पाइपलाइन प्रणाली के माध्यम से रंगपूरी के तालाब तक इस शुद्धिकृत जल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे तालाब फिर से एक सक्रिय और जीवंत जल स्रोत के रूप में स्थापित हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यवस्था मानसून के दौरान अतिरिक्त बहाव (स्टॉर्म रन-ऑफ) को प्राकृतिक जलाशयों तक पहुंचाने में भी कारगर होगी। इससे न केवल जलभराव की समस्या कम होगी, बल्कि शहर के पारंपरिक तालाबों और जल स्रोतों को दोबारा स्थिरता और जीवन मिलेगा।
व्यापक योजना का हिस्सा
यह पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली के ड्रेनेज मास्टर प्लान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें पूरे शहर के कई जलाशयों को पुनर्जनन देने के लिए इसी तरह के प्रयास प्रस्तावित हैं। यह योजना विशेष रूप से पारंपरिक तालाबों और झीलों की जल संचयन क्षमता को बहाल करने पर केंद्रित है, ताकि वे प्राकृतिक जल प्रबंधन में अपनी भूमिका फिर से निभा सकें।
मानसून के दौरान नालियों पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव के कारण अक्सर जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अतिरिक्त वर्षा जल को प्राकृतिक जलाशयों की ओर मोड़ा जाए, तो यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
इस परियोजना पर लगभग सात करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसे पूरा करने में करीब तीन महीने लगने का अनुमान है। इस प्रयास से न सिर्फ रंगपूरी का सूखा तालाब दोबारा जीवन पा सकेगा, बल्कि यह दिल्ली के समग्र जल प्रबंधन के लिए एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में भी उभर सकता है।
यदि यह पायलट सफल रहता है, तो शहर के अन्य सूखे जलाशयों को पुनर्जनन देने के लिए भी इसी तरह के कई प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं। इससे राजधानी में जल संरक्षण, भूजल स्तर सुधार और बरसाती पानी के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी।
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