Delivery App Zomato-Swiggy : जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसे फूड डिलीवरी ऐप्स (Delivery App Zomato-Swiggy) से कंज्यूमर्स और डिलीवरी वर्कर्स की नाराजगी पूरे देश में बढ़ रही है. लोकलसर्कल्स के एक हालिया सर्वे में पता चला है कि 55% कंज्यूमर्स ने कहा कि इन ऐप्स से खाना ऑर्डर करने पर उन्हें रेस्टोरेंट में खाने की तुलना में ज़्यादा पैसे देने पड़ते हैं.

इसका कारण ऐप्स द्वारा रेस्टोरेंट से लिया जाने (Delivery App Zomato-Swiggy) वाला 20-30% का भारी कमीशन है, जिसका सीधा असर कस्टमर्स की जेब पर पड़ता है. इस सर्वे में देश भर के 359 जिलों से 79,000 से ज़्यादा जवाब शामिल थे. 61% जवाब देने वाले पुरुष थे और 39% महिलाएं थीं.
45% पार्टिसिपेंट्स टियर 1 शहरों से थे, 33% टियर 2 शहरों (Delivery App Zomato-Swiggy) से और 22% टियर 3, 4 और ग्रामीण इलाकों से थे. यह सर्वे लोकलसर्कल्स प्लेटफॉर्म पर किया गया था, और सभी पार्टिसिपेंट्स वेरिफाइड नागरिक थे. सर्वे में हिस्सा लेने के लिए लोकलसर्कल्स पर रजिस्ट्रेशन जरूरी था.
2030 तक फूड मार्केट 12 लाख करोड़ तक पहुंचेगा
भारत का (Delivery App Zomato-Swiggy) ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट 2024 में लगभग $31.8 बिलियन (₹2.86 लाख करोड़) था. स्मार्टफोन, इंटरनेट और शहरीकरण के बढ़ते इस्तेमाल के कारण, इस मार्केट के 2030 तक ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.
क्विक डिलीवरी ऐप के आधे से ज़्यादा ऑप्शन जंक फूड हैं- Delivery App Zomato Swiggy
शहरी भारत में जंक फूड खाने का (Delivery App Zomato-Swiggy) चलन तेजी से बढ़ रहा है. लोकलसर्कल्स सर्वे के अनुसार, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले आधे से ज़्यादा पैकेट वाले फूड आइटम में फैट, चीनी और नमक (HFSS) ज़्यादा होता है या वे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) होते हैं.
सर्वे में पता चला कि 39% परिवार नियमित रूप (Delivery App Zomato-Swiggy) से सॉफ्ट ड्रिंक्स, बिस्कुट, चिप्स और नूडल्स जैसी चीज़ें खरीदते हैं, जिसका मतलब है कि हर 10 में से 4 परिवार जंक फूड ऑर्डर कर रहे हैं. खास बात यह है कि इन चीज़ों को ऑर्डर करने वालों में बच्चे और युवा सबसे बड़ा ग्रुप हैं.
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