कनाडा सालों से खालिस्तान की मांग करने वाले अलगाववादियों को संरक्षण देता रहा है. भारत ने जब भी ऐसे अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की तो उसने हमेशा खारिज कर दिया, लेकिन अब उसके घर में ही ‘खालिस्तान’ की आग लग गई है. अल्बार्टा की अलगाववादी ताकतों ने इसको कनाडा से अलग होने की मांग उठाई है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने पिछले अप्रैल से तीन बार एक ऐसे संगठन के नेताओं से मुलाकात की है जो चाहते हैं कि अल्बर्टा, कनाडा से अलग हो जाए. इस संगठन का नाम है- अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट, जो कि अल्बार्टा की आजादी के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग कर रहा है.
कनाडा सालों से खालिस्तान की मांग करने वाले अलगाववादियों को पनाह देता रहा है. जब भी भारत ने इन पर कार्रवाई की मांग की है तो कनाडा ने खारिज कर दिया. अब उसके घर में ही अलगाववाद की आग लगी है.
अल्बर्टा पश्चिमी कनाडा का एक तेल से भरपूर प्रांत है, जो लगभग अमेरिका के टेक्सास जितना बड़ा शहर है. इस शहर में करीब 50 लाख लोग निवास करते हैं और यह प्रांत रॉकीज पर्वत श्रृंखला और बैनफ और लेक लुईस जैसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन से घिरा हुआ है.
कनाडा में जितने तेल का उत्पादन होता है, उसका 84 प्रतिशत हिस्सा मात्र अल्बार्टा शहर में ही निकलता है. इसलिए इसे कनाडा का एनर्जी प्रांत भी कहा जाता है. राजनीतिक लिहाजा से इसे कनाडा की कंजर्वेटिव पार्टी का गढ़ माना जाता है, हालांकि इसके शहर क्षेत्र ज्यादा प्रगतिशील हैं.
बताते चले कि ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में 18 जून, 2023 को एक गुरुद्वारे के बाहर अज्ञात हमलावरों ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. भारत ने उसे आतंकवादी घोषित कर दिया था, जोकि खालिस्तान टाइगर फोर्स का चीफ था. कनाडा ने इस हत्याकांड में भारत की संलिप्तता का दावा किया. हालांकि, भारत ने कनाडा के आरोपों को बेबुनियाद बताया था. इस विवाद में कनाडा अब तक भारत को एक भी सबूत भी नहीं दे पाया है.
कनाडा करीब 50 सालों से खालिस्तान की मांग करने वाले अलगाववादियों को पनाह देता रहा है. जब भी भारत ने कनाडा से इन पर कार्रवाई की मांग की है तो इसने खारिज कर दिया है. पीएम कार्नी से पहले जब ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर बवाल खड़ा कर दिया था. उन्होंने निज्जर की हत्या की अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच की मांग की थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया था.
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