आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की धरती से हमेशा के लिए नक्सलवाद का दंश खत्म हो जाए इसके लिए सक्रिय नक्सलियों के पुनर्वास की योजना लेकर आई, जिसका असर देखने को मिला. अब साय सरकार जेल में कैद नक्सलियों के भी पुनर्वास करने की योजना तैयार करने में जुटी है.

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बीते 2 वर्षों में 500 से अधिक माओवादी मारे गए, 3 हजार माओवादियों ने पुनर्वास किया. करीब 2 हजार माओवादियों की गिरफ्तारियां भी हुई है. नक्सल मामलों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जेलों में बंद माओवादी जो छुट-पुट घटनाओं में शामिल रहे. ऐसे माओवादियों के प्रकरण को वापस लेने और उनका पुनर्वास कराने की योजना सरकार की है.

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा था कि सरकार की पुनर्वास नीति केवल कागज का पुलिंदा नहीं है, और केवल ईनाम की राशि नहीं है. पुनर्वास नीति में बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम भी शामिल है. पुनर्वास नीति के माध्यम से यह कल्पना सरकार की है कि यदि जंगल से पुनर्वास हो सकता है, तो जेलों से भी पुनर्वास किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि जंगल से पुनर्वास किए माओवादी जेलों में जाकर अपने परिजनों और अपने मित्रों से मिलते हैं. अगले चरण में जेलों में बंद माओवादियों को पैरोल पर निकालकर पुनर्वास केंद्रों में लाकर मिलाया जाएगा. और जिन्होंने पुनर्वास किया है वे जेलों में बंद माओवादियों को पुनर्वास के लिए प्रेरित करेंगे. जिसके बाद सरकार उनके जमानत के लिए कार्य करेगी. और जमानत पर आकर पुनर्वास केंद्रों में रहकर सामान्य जीवन जी सकते हैं.

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