रेणु अग्रवाल, धार। धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद मामले से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। मुस्लिम पक्ष एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हैं। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 16 मार्च के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
दरअसल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने 16 मार्च के आदेश में जजों ने विवादित जगह का खुद निरीक्षण करने का फैसला लिया था। साथ ही 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई की बात कही थी। इसके बाद हाईकोर्ट के जज 28 मार्च को भोजशाला पहुंचे थे। इतिहास में पहली बार किसी न्यायाधीश ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर निरीक्षण किया। इस दौरान परिसर के हर हिस्से का बारीकी से मुआयना किया गया।
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SC में इस दिन होगी सुनवाई
हाईकोर्ट जज के साथ धार कलेक्टर, DIG, SP मयंक अवस्थी, SDM राहुल गुप्ता, सीएसपी सुजावल जग्गा और तहसीलदार समेत प्रशासनिक दल भी भोजशाला परिसर पहुंचा था। इसे लेकर अब मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई है। SC इस पर 1 अप्रैल को सुनवाई करेगा।
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ये है पूरा मामला
यह पूरा मामला उस आदेश से जुड़ा है, जो 22 मार्च 2024 को इंदौर हाईकोर्ट ने जारी किया था। कोर्ट ने विवादित भोजशाला परिसर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को वैज्ञानिक सर्वे करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने करीब 100 दिनों तक लगातार सर्वे किया, जिसमें ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार, खुदाई, संरचनात्मक जांच और ऐतिहासिक अवशेषों का अध्ययन शामिल था।
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दोनों पक्ष का अपना-अपना दावा
सर्वे के दौरान परिसर के अंदर कई ऐसे अवशेष मिलने का दावा किया गया, जिन्हें लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग व्याख्या सामने आई। हिंदू पक्ष का कहना है कि सर्वे में मंदिर से जुड़े प्रमाण मिले हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कई बिंदुओं पर आपत्ति उठाते हुए रिपोर्ट की व्याख्या पर सवाल खड़े किए हैं। इसी कारण हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को विस्तृत आपत्तियां और सुझाव देने का मौका दिया था।
जैन समाज ने भी हाईकोर्ट में लगाई है याचिका
गौरतलब है कि धार भोजशाला विवाद पर लंबे समय से हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है और हर तारीख के साथ मामला और उलझता जा रहा है। इन सबके बीच जैन समाज ने भी एक याचिका लगाई है। जिसमें दावा किया गया है कि ASI के सर्वे के दौरान जैन धर्मस्थल होने के सबूत मिले हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि अगली सुनवाई में ASI की सर्वे रिपोर्ट, पक्षकारों के दावे और आपत्तियां और जैन समाज की नई याचिका, इन तीनों पर एक साथ बहस हो सकती है, जिससे मामला निर्णायक दौर में पहुंच सकता है।
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