मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच श्रीलंका ने पेट्रोल‑डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है. एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी और 1 मार्च के बाद तीसरी बढ़ोतरी है, जिससे मुद्रास्फीति और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका है. बस ऑपरेटरों ने हड़ताल की चेतावनी दी है, जबकि महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. ऊर्जा संकट ने 2022 जैसी आर्थिक चुनौतियों की यादें ताजा कर दी हैं. निजी बस ऑपरेटरों ने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है और ऐसा नहीं होने पर देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है.

मिडिल ईस्ट संकट का असर अब श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है. सरकार ने ईंधन कीमतों में करीब 25% की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे आम जनता और परिवहन क्षेत्र पर दबाव बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ छोटे देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है. इसी कड़ी में श्रीलंका सरकार ने रविवार को ईंधन की कीमतों में करीब 25% तक बढ़ोतरी कर दी. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है. नई बढ़ोतरी के बाद श्रीलंका में ऑटो डीजल की कीमत 303 रुपये से बढ़कर 382 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि सुपर डीजल 353 से बढ़कर 443 रुपये हो गया. पेट्रोल 92 ऑक्टेन 317 से 398 रुपये और 95 ऑक्टेन 365 से 455 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. केरोसिन की कीमत में भी 30% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 

इस बढ़ोतरी के बाद श्रीलंका में ईंधन कीमतें फिर 2022 के आर्थिक संकट के स्तर के करीब पहुंच गई हैं. श्रीलंका में ईंधन महंगा होने से सार्वजनिक परिवहन पर भी बड़ा असर पड़ा है. निजी बस ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर किराया नहीं बढ़ाया गया तो 90 प्रतिशत बसें सड़कों से हट सकती हैं. 

निजी बस ऑपरेटरों ने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है और ऐसा नहीं होने पर देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है. उधर, नेशनल ट्रांसपोर्ट कमीशन के अनुसार डीजल की नई कीमतों के आधार पर बस किराए में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि तय है, जिस पर जल्द कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है.

डेली मिरर अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, एनटीसी के महानिदेशक निलान मिरांडा ने एक बयान में कहा कि संशोधित बस किराए को फार्मूले के अनुसार लागू करने के लिए सोमवार को कैबिनेट की मंजूरी मिलने वाली है. श्रीलंका के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस में प्राइवेट कंपनियों का दबदबा है, जिनका मार्केट शेयर 65-75 प्रतिशत है. वहीं सरकार की हिस्सेदारी लगभग 25-35 प्रतिशत है. विपक्ष ने ईंधन की कीमतें बढ़ाने के लिए सरकार की आलोचना की है.

श्रीलंका मुख्य रूप से सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण कोरिया से प्रोसेस्ड पेट्रोलियम उत्पाद प्राप्त करता है, जबकि ईरान द्वारा निर्मित रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल मध्य पूर्व से आयात करता है. लगातार हो रही मूल्य वृद्धि से परिवहन लागत और समग्र मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे पहले से ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे व्यवसायों और परिवारों दोनों पर असर पड़ेगा.

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