छत्तीसगढ़ में पुलिस की मिलीभगत से फल फूल रहा कोयले का काला कारोबार, जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी

शिवम मिश्रा,रायपुर. कोयले के काले कारोबार में पुलिस के चौकी प्रभारी की संदिग्ध भूमिका का खुलासा हुआ है. ये चौकी प्रभारी सिल्तरा का है जहां सैकड़ों प्लांट मौजूद है और यहां रोजाना हजारों ट्रक कोयले की लोडिंग और अनलोडिंग होती है. 5 अगस्त यानी बुधवार रात से सिल्तरा का एक मामला प्लांट मालिकों के बीच काफी चर्चा में है. ये मामला कोयले के काले कारोबार से जुड़ा हुआ है. इसमें चौकी प्रभारी की भूमिका संदिग्ध इसलिए हैं, क्योंकि इसके कई सबूत लल्लूराम डॉट कॉम के पास मौजूद हैं.

हुआ कुछ यूं कि सिलतरा चौकी प्रभारी डीडी मानिकपुरी सिल्तरा स्थित एक स्पंज आयरन प्लांट पहुंचे. अब पुलिस यदि किसी प्लांट में पहुंचे तो पहली नजर में ऐसा लगता है कि प्लांट में कोई अवैध कारोबार चल रहा होगा, जिसकी लिखित शिकायत पुलिस तक पहुंची होगी और पुलिस वहां कार्रवाई करने पहुंची है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है. अब सवाल ये है कि चौकी प्रभारी खुद प्लांट कैसे पहुंचे. तो बात ऐसी है कि स्पंज आयरन प्लांट के मालिक ने एक माइंस से 6 ट्रक कोयला खरीदा था. लेकिन जिस ग्रेड का कोयला माइंस वाले ने उसे सैंपल के तौर पर बताया था उसका उल्टा यानी घटिया क्वालिटी का कोयला उसके प्लांट में पहुंच गया.
 कोयले की क्वालिटी देखकर उक्त प्लांट मालिक को पहली नजर में लगा कि माइंस प्रबंधन ने उसके साथ गड़बड़ी की है. उसने माइंस प्रबंधन से इस बात की शिकायत की कि जो सैंपल उसे भेजा गया था वह डिलिवर क्यों नहीं किया गया. माइंस प्रबंधन ने उक्त प्लांट के मालिक से 6 ट्रक से पहुंचे कोयले का सैंपल भेजने कहा. जब उसका सैंपल पहुंचा तो माइंस प्रबंधन भी दंग रह गया कि ये कोयला तो उसके माइंस का है ही नहीं.
माइंस प्रबंधन ने पूरी बात प्लांट मालिक को बताई और कहा कि उसने यह कोयला भेजा ही नहीं है और ये कोयला उनके माइंस का नहीं है. अब यानी स्पष्ट है कि कोयले की ट्रांसपोर्टिंग के दौरान कुछ न कुछ गड़बड़ी हुई है. फिर इस पूरे खेल में इंट्री होती है गणेश ट्रांसपोर्ट की. क्योंकि ये वहीं ट्रांसपोर्ट है जिसने माइंस से कोयला लोड किया और स्पंज आयरन प्लांट में पहुंचाया. अब तक तो सब कुछ ठीक था, लेकिन अब भी ये स्पष्ट नहीं होता कि भला सिलतरा चौकी के प्रभारी डीडी मानिकपुरी स्पंज आयरन प्लांट क्यों गए. जब ट्रक घटिया कोयला लेकर प्लांट पहुंचा तो प्लांट मालिक ने ट्रांसपोर्टर से स्पष्ट कहा कि जो कोयला आना था वह नहीं आया है और रास्ते में कही कोई गड़बड़ी हुई है, जिससे उसे लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है.
 उन्होंने अपने प्लांट में ट्रक को खाली नहीं किया और उसे रुकने कहा. ये जानकारी इसके बाद लल्लूराम डॉट कॉम को मिली कि कोयला का ऐसा काला कारोबार संचालित हो रहा है. तो लल्लूराम डॉट कॉम के रिपोर्टर ने सबसे पहले फोन चौकी प्रभारी को लगाया. पूछा कि कोई शिकायत आई है क्या कोयले के काले कारोबार से जुड़ी. इस पर डीडी मानिकपुरी कहते है कि उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली और ऐसा कोई मामला नहीं है. लेकिन उनकी बातों से हमें ये अहसास हो गया था कि साहब या तो झूठ बोल रहे है या हमसे कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे है.
हमने अपनी पड़ताल जारी रखी. हमने किसी तरह स्पंज आयरन प्लांट से संपर्क किया, तो पता चला कि वहां कुछ घंटे पहले चौकी प्रभारी पहुंचे थे और वहां रोके गए ट्रक को छोड़ने और न छोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी या यूं कहे तो धमकी देकर आए थे. चौकी प्रभारी इस खेल में कितने लिप्त है ये तो जांच का विषय है, लेकिन वहां उन्होंने ट्रक की रखवाली करने अपने एक स्टॉफ को तैनात कर दिया.
 हम अगले दिन यानी गुरुवार को सिलतरा थाने पहुंचे. वहां फिर से पूरी बातचीत की और साहब को ये बताया कि उन्होंने हमसे बात छिपाई है और हमारे पास वो सीसीटीवी फूटेज भी मौजूद है जिसमें वे प्लांट के अंदर मौजूद दिख रहे है. इतना सुनते ही साहब हड़बड़ा गए, मानों ऐसा लगा कि उनकी चोरी पकड़ा गई हो. इसी बीच इस पूरे मामले में इंट्री होती है मोहन अग्रवाल की,जो कि हरियाणा ढ़ाबा के नाम से एक ढ़ाबा चलाते हैं. नाम इनका भले ही भगवान श्री कृष्ण का हो. लेकिन इनके काम कोयले से भी काले है.
 सिलतरा प्लांट मालिकों के बीच कोयला किंग के नाम से मशहूर मोहन अग्रवाल ने स्पंज आयरन प्लांट के मालिक से संपर्क किया और मामला जल्द सैटलमेंट करने की बात कही. मोहन अग्रवाल ने कहा ड्राइवरों से गलती हो गई और जो भी रिकवरी होगी या कोयले की जो कीमत होगी वो लौटा देंगे. अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि अब तक तो इस पूरे मामले में सिलतरा चौकी प्रभारी, स्पंज आयरन प्लांट और गणेश ट्रांसपोर्ट था वहां अचानक से कोयला किंग मोहन अग्रवाल की इंट्री कैसे हो गई.
 तो कौन है कोयला किंग और कैसा है मोहन अग्रवाल का काला कारोबार, इसके लिए लगातार पढ़ते रहें लल्लूराम डॉट कॉम
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