अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2026 में चीन यात्रा की पुष्टि की है. ट्रंप ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक समिट के लिए अप्रैल में चीन जाएंगे. इसके साथ ही प्रेसिडेंट शी के इस साल के आखिर में अमेरिका आने की उम्मीद है. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ‘हां, मैं अप्रैल में राष्ट्रपति शी से मिलने जाऊंगा. मैं इसका इंतजार कर रहा हूं. दोनों नेताओं के बीच हाल ही में फोन पर व्यापार, ऊर्जा, ताइवान और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-चीन संबंध इस समय अच्छे हैं. यह समिट ऐसे दौर में हो रही है जब दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा जारी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल 2026 में चीन जाएंगे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी साल के आखिर में अमेरिका आ रहे हैं, और मुझे इसका भी काफी इंतजार है.
वह ट्रंप ने बीजिंग के साथ अमेरिका के संबंधों को स्थिर बताया. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘नहीं, चीन के साथ हमारे संबंध अभी बहुत अच्छे हैं. राष्ट्रपति शी के साथ मेरे संबंध बहुत अच्छे हैं.’ उन्होंने यह नहीं बताया कि शी का अमेरिका दौरा कब होगा, बस इतना कहा कि यह इस साल के आखिर में होगा.
बता दें, हाल ही ट्रंप के मुताबिक, यह बातचीत लंबी और गहन रही और इसमें व्यापार, सैन्य सहयोग, चीन की उनकी प्रस्तावित अप्रैल यात्रा, ताइवान, रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान की स्थिति और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग जैसे विषय शामिल रहे.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, ‘मेरी अभी चीन के राष्ट्रपति शी के साथ टेलीफोन पर काफी अच्छे से बातचीत हुई है. यह एक लंबी और विस्तारपूर्ण बातचीत थी. आर्थिक मुद्दों पर विशेष जोर देते हुए ट्रंप ने कहा कि बातचीत में चीन की ओर से अमेरिका से ऊर्जा और कृषि उत्पादों की खरीद पर चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने चीन की ओर से अमेरिका से तेल और गैस की खरीद के साथ-साथ अमेरिकी कृषि उत्पादों की अतिरिक्त खरीद पर भी बात की.
अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका-चीन के संबंध व्यापार, तकनीक और सुरक्षा में कॉम्पिटिशन से निर्धारित हो रहे हैं. एक तरफ दोनों देशों के बीच टैरिफ और सेमीकंडक्टर एक्सपोर्ट कंट्रोल को लेकर टकराव जारी है. दूसरी ओर हिंद-प्रशांत में रणनीतिक दुश्मनी भी गहरी हो गई है.
भारत के लिए, अमेरिका और चीन के बीच बातचीत का क्षेत्रीय असर होता है. गलवान में हुए विवाद के बाद से भारत और चीन के बीच काफी तनाव था, जो हाल के कुछ सालों में कम होता नजर आ रहा है.
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