Donald Trump On Nobel Peace Prize: नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दर्द छलका है। डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को टैरिफ नीति, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों, भारत-पाकिस्तान तनाव, संयुक्त राष्ट्र (UN), नाटो और नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने ‘आठ’ युद्धों को रोककर लाखों लोगों की जान बचाई है, इसलिए उन्हें हर युद्ध के लिए एक यानी कि कुल आठ नोबेल पुरस्कार मिलने चाहिए थे। ट्रंप ने नॉर्वे की सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर उन्हें यह पुरस्कार नहीं दिया। हालांकि, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोर ने साफ-साफ कहा है कि सरकार का नोबेल पुरस्कार देने से कोई लेना-देना नहीं है।
अपने दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि 10 महीनों में मैंने भारत-पाकिस्तान समेत 8 युद्ध रुकवाए। दुनिया को न्यूक्लियर वॉर से बचाया। मुझे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था।
ट्रंप ने कहा कि इन आठ लड़ाइयों में सबसे अहम भारत-पाकिस्तान युद्ध था। दोनों न्यूक्लियर संपन्न देश हैं। दोनों देश हालात बेहद गंभीर मोड़ पर थे और हालात परमाणु युद्ध तक जा सकते थे लेकिन दुनिया एक बड़े यहां तक कि न्यूक्लियर वॉर से बच गई। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें निष्पक्ष तरीके से आंका जाता तो हर युद्ध रुकवाने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था।
मुझे हर युद्ध के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए था
ट्रंप ने कहा, ‘मुझे हर युद्ध के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए था। लेकिन मैं यह नहीं कहता। मैंने लाखों लोगों की जान बचाई है। कोई ये न कहे कि नॉर्वे इसे नियंत्रित नहीं करता, ठीक है? यह नॉर्वे में है। नॉर्वे ही सब कुछ नियंत्रित करता है।’ ट्रंप ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो की तारीफ की, जिन्होंने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार ‘पेश’ किया था। ट्रंप ने कहा कि माचाडो ने यह माना कि इस पुरस्कार का असली हकदार मैं हूं। ट्रंप ने कहा, ‘मारिया ने जो किया, उसके लिए मैं उनका काफी सम्मान करता हूं। उन्होंने कहा कि नोबेल पुरस्कार उन्हें नहीं बल्कि मुझे मिलना चाहिए था।
नार्वे के पीएम से की थी नोबेल न मिलने की शिकायत
बता दें कि वहीं, माचाडो के इस कदम के बाद नोबेल फाउंडेशन ने साफ किया कि कोई नोबेल पुरस्कार विजेता यह सम्मान किसी दूसरे शख्स को नहीं दे सकता। संस्थान ने बयान जारी कर कहा कि पुरस्कार विजेता इसे किसी और के साथ साझा नहीं कर सकता और न ही घोषणा के बाद इसे ट्रांसफर कर सकता है। ट्रंप ने पहले भी नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोर से नोबेल पुरस्कार न मिलने की शिकायत की थी। ट्रंप ने अपने मैसेज में कहा था, ‘प्रिय जोनास: चूंकि आपके देश ने मुझे 8 युद्धों को रोकने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया, इसलिए अब सिर्फ शांति के बारे में सोचने की मेरी कोई मजबूरी नहीं है। हालांकि शांति हमेशा मेरी मुख्य प्राथमिकता रहेगी, लेकिन अब मैं अमेरिका के लिए क्या अच्छा और सही है, उसी के बारे में सोचूंगा।

ट्रम्प के खिलाफ अमेरिका में विरोध प्रदर्शन
इधर US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने पर अमेरिका के कई शहरों में उनके खिलाफ प्रदर्शन हुए। एक्टिविस्ट और आम लोग उनकी अलग-अलग नीतियों से नाराज़ दिखे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ट्रंप की नीतियों ने दुनिया भर में अमेरिका की सालों से बनी अच्छी छवि और भरोसे को नुकसान पहुंचाया है। लोगों ने पोस्टर, पुतले, खास तरह के कपड़े और नारों के ज़रिए अपना विरोध दर्ज कराया। पिछले एक साल में ट्रंप प्रशासन को कई फैसलों की वजह से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। इनमें दूसरे देशों को टैरिफ लगाने की धमकी देना, अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए ICE का खुलकर इस्तेमाल करना और अमेरिका को WTO, UN और NATO जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूर करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ये नीतियां अमेरिका को और अलग-थलग कर रही हैं।
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